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‘अमेरिकी सैन्य हमले की आशंका पर विचार’: कनाडाई PM मार्क कार्नी के बयान से मची खलबली

उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप और पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों के पारंपरिक रक्षा गठबंधनों के इतिहास में एक ऐसा अप्रत्याशित बयान सामने आया है जिसने वाशिंगटन से लेकर ओटावा तक के कूटनीतिक गलियारों में गहरा सन्नाटा और बेचैनी पैदा कर दी है। कनाडा के नवनियुक्त प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार कर सभी को हैरान कर दिया है कि उनकी सरकार ने संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा कनाडा के खिलाफ की जाने वाली संभावित सैन्य कार्रवाई के जोखिम और परिदृश्यों पर औपचारिक रूप से विचार किया है। दशकों से दुनिया की सबसे लंबी, शांतिपूर्ण और खुली सीमा साझा करने वाले दो घनिष्ठ सहयोगी देशों के बीच इस प्रकार की सैन्य आशंका की चर्चा होना अपने आप में अभूतपूर्व है। इस बयान के सामने आते ही दोनों देशों की मीडिया, रक्षा थिंक टैंकों और राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। कार्नी ने इस संभावना को स्पष्ट करते हुए कहा कि हालांकि यह घटना बेहद कम संभावना वाली (लो प्रॉबेबिलिटी) है, लेकिन राष्ट्रीय संप्रभुता के नजरिए से यह अत्यंत गंभीर और विनाशकारी जोखिम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपने नागरिकों और सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी काल्पनिक खतरे का विश्लेषण करना और रणनीतिक तैयारी रखना किसी भी संप्रभु सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है, भले ही यह उनकी सरकार का प्राथमिक पूर्वानुमान न हो।

वाशिंगटन और ओटावा के बीच खटास: व्यापार विवाद और 51वें राज्य का तंज

यह असाधारण बयान अचानक शून्य से नहीं उपजा है, बल्कि इसके पीछे पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों में लगातार बढ़ रही कड़वाहट और भू-राजनीतिक अविश्वास की पृष्ठभूमि है। दोनों देशों के बीच लगभग 8,900 किलोमीटर लंबी साझी सीमा है, जो दुनिया की सबसे बड़ी गैर-सैन्यीकृत सीमा मानी जाती है। बावजूद इसके, पिछले कुछ समय से व्यापार नीतियों, आयात शुल्कों (टैरिफ), ऊर्जा आपूर्ति और सीमा सुरक्षा को लेकर दोनों राजधानियों के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा था। इस विवाद में घी डालने का काम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन विवादास्पद टिप्पणियों ने किया, जिसमें उन्होंने बार-बार व्यंग्यात्मक या आक्रामक लहजे में कनाडा को अमेरिका का '51वां राज्य' बनाने की बात कही थी। कनाडा के राजनीतिक हलकों में इन बयानों को केवल चुनावी बयानबाजी नहीं, बल्कि कनाडाई संप्रभुता और राष्ट्रीय पहचान के लिए एक प्रत्यक्ष अपमान और संप्रभुता पर मंडराते परोक्ष खतरे के रूप में देखा गया। प्रधानमंत्री कार्नी की हालिया टिप्पणी उसी संचित कनाडाई रोष और रक्षात्मक मानसिकता की मुखर अभिव्यक्ति मानी जा रही है।

रक्षा बजट का विशाल अंतर: 1 ट्रिलियन डॉलर बनाम 37 बिलियन डॉलर

यदि दोनों देशों की रक्षा क्षमताओं और आर्थिक खर्च की तुलना की जाए, तो संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के बीच का फासला किसी भी पैमाने पर अतुलनीय दिखाई देता है। अमेरिका का सैन्य बजट वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर है, जो दुनिया के अगले कई देशों के कुल रक्षा बजट से भी अधिक है। वित्तीय वर्ष 2025 में वाशिंगटन का रक्षा खर्च लगभग 895 बिलियन अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया था, जबकि वर्ष 2026 में यह आंकड़ा ऐतिहासिक स्तर को पार करते हुए लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, वित्तीय वर्ष 2027 के लिए अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने लगभग 1.45 ट्रिलियन डॉलर के भारी-भरकम बजट की मांग प्रस्तुत की है। इसके विपरीत, कनाडा की अर्थव्यवस्था और रक्षा प्राथमिकताएं हमेशा से सीमित रही हैं। कनाडा का कुल रक्षा खर्च वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 25 बिलियन डॉलर था, जिसके 2026-27 के दौरान मामूली बढ़ोतरी के साथ 37 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। बजट का यह भारी अंतर साफ दर्शाता है कि अमेरिका अनुसंधान, तकनीकी विकास, हथियार खरीद और वैश्विक सैन्य अभियानों में कनाडा से लगभग 25 से 30 गुना अधिक धन खर्च करता है।

थल सेना और बख्तरबंद ताकत: 13.4 लाख सैनिकों के सामने 68 हजार का कार्यबल

रक्षा बजट की तरह ही दोनों देशों की सैन्य जनशक्ति (मैनपावर) और पारंपरिक थल सेना में भी भारी असमानता मौजूद है। अमेरिकी सेना की वित्तीय वर्ष 2027 योजना के अनुसार, उसके पास लगभग 1.34 मिलियन (13.4 लाख) सक्रिय-ड्यूटी नियमित सैन्य कर्मी हैं, जिनके साथ लाखों की संख्या में प्रशिक्षित नेशनल गार्ड और रिजर्व फोर्स का बैकअप जुड़ा हुआ है। इसके ठीक उलट, कनाडा की नियमित सशस्त्र सेना में महज 68,473 सक्रिय कर्मी तैनात हैं। हालांकि ओटावा वर्तमान में अपनी सैन्य भर्ती प्रक्रियाओं को गति देकर और कार्यबल का विस्तार करके इस संख्या को बढ़ाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है, लेकिन दोनों देशों की पैदल सेना की संख्या में जमीन-आसमान का अंतर बना हुआ है। बख्तरबंद वाहनों और युद्धक टैंकों की बात करें तो अमेरिकी सेना मुख्य रूप से युद्ध-परीक्षित M1 अब्राम्स मेन बैटल टैंक (M1 Abrams MBT) और ब्रैडली फाइटिंग व्हीकल्स के विशाल बेड़े पर निर्भर है, जिन्होंने खाड़ी युद्ध से लेकर हालिया अभ्यासों तक अपनी मारक क्षमता साबित की है। दूसरी ओर, कनाडा की सेना जर्मन-निर्मित लेपर्ड 2 (Leopard 2) मेन बैटल टैंकों और हल्के बख्तरबंद वाहनों (LAVs) का उपयोग करती है, जो गुणवत्ता में उत्कृष्ट होने के बावजूद संख्यात्मक दृष्टि से बेहद सीमित हैं।

आसमान पर वर्चस्व: अमेरिकी फिफ्थ जेनरेशन फ्लीट बनाम कनाडा का अपग्रेड

हवाई ताकत और हवाई संप्रभुता के मामले में भी अमेरिकी वायुसेना (USAF) और कनाडाई रॉयल एयर फोर्स (RCAF) के बीच का संतुलन पूरी तरह एकतरफा है। अमेरिका के पास पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट्स का दुनिया का सबसे बड़ा और शक्तिशाली जत्था है, जिसमें F-35A लाइटनिंग II और हवाई वर्चस्व का बेताज बादशाह F-22 रैप्टर शामिल हैं। इसके अलावा, अमेरिका F-15EX और F-16 जैसे हजारों आधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ-साथ B-1B लांसर, B-2 स्पिरिट स्टील्थ और B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस जैसे अंतरमहाद्वीपीय स्ट्रैटेजिक बॉम्बर विमानों का संचालन करता है, जो दुनिया के किसी भी कोने में घंटों के भीतर भारी बमबारी करने में सक्षम हैं। दूसरी तरफ, कनाडा की हवाई सुरक्षा काफी हद तक अपने पुराने पड़ चुके चार दशक पुराने CF-18 हॉर्नेट विमानों के भरोसे चल रही थी। हालांकि कनाडा ने पुराने बेड़े को बदलने के लिए 88 अत्याधुनिक F-35A स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने का ऐतिहासिक रक्षा सौदा किया है, लेकिन यह कार्यक्रम अभी आपूर्ति और प्रशिक्षण के चरण में है। समझौते के तहत पहले आठ F-35 विमान कनाडाई पायलटों को प्रशिक्षित करने के लिए अमेरिका स्थित ठिकानों पर भेजे जाएंगे और पहला ऑपरेशनल विमान वर्ष 2028 तक ही कनाडा की धरती पर तैनात हो सकेगा।

समुद्र में एकतरफा दबदबा: ग्लोबल ब्लू-वाटर नेवी बनाम कोस्टल गश्ती बेड़ा

नौसैनिक शक्ति के मोर्चे पर संयुक्त राज्य अमेरिका एक निर्विवाद वैश्विक सुपरपावर है। अमेरिकी नौसेना (US Navy) के पास 11 परमाणु-संचालित सुपर एयरक्राफ्ट कैरियर, वर्जीनिया और लॉस एंजिल्स क्लास की दर्जनों न्यूक्लियर अटैक सबमरीन (SSN), ओहायो-क्लास की बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन (SSBN) और अर्ले बर्क-क्लास गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स का विशाल जत्था मौजूद है। यह क्षमता अमेरिका को अपने घरेलू तटों से हजारों किलोमीटर दूर किसी भी महासागर में महीनों तक निरंतर युद्ध लड़ने और एयर स्ट्राइक करने की असीमित ताकत प्रदान करती है। इसके विपरीत, रॉयल कैनेडियन नेवी (RCN) मूल रूप से एक तटीय रक्षा और सहयोगी भूमिका वाली नौसेना है। कनाडा का नौसैनिक बेड़ा मुख्य रूप से उम्रदराज हो चुके हैलिफैक्स-क्लास फ्रिगेट्स, चार पुरानी विक्टोरिया-क्लास डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों, किंग्स्टन-क्लास कोस्टल डिफेंस वेसल्स और हाल ही में शामिल किए गए हैरी डीवोल्फ-क्लास आर्कटिक और अपतटीय गश्ती जहाजों (AOPS) पर आधारित है। कनाडा के पास न तो कोई विमानवाहक पोत है और न ही कोई परमाणु पनडुब्बी, जिससे उसकी समुद्री पहुंच मुख्य रूप से अपनी तीन समुद्री सीमाओं तक ही सीमित रह जाती है।

परमाणु क्षमता और आर्कटिक की सामरिक ढाल

दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा और मौलिक भू-सामरिक अंतर परमाणु हथियारों की मौजूदगी का है। संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया की सबसे शक्तिशाली परमाणु शक्तियों में से एक है, जिसके पास जमीन से दागी जाने वाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBMs), समुद्र के भीतर छिपी बैलिस्टिक-मिसाइल पनडुब्बियां और परमाणु बमवर्षक विमानों से लैस एक पूर्ण और अचूक न्यूक्लियर ट्रायड मौजूद है। दूसरी तरफ, कनाडा एक गैर-परमाणु राष्ट्र है जिसके पास अपना कोई स्वतंत्र परमाणु हथियार भंडार नहीं है। हालांकि, कनाडा की असली रणनीतिक ताकत उसकी भौगोलिक अवस्थिति और विशाल बर्फीला आर्कटिक क्षेत्र है। उत्तरी ध्रुव के करीब स्थित कनाडा का विस्तृत भूभाग उत्तरी अमेरिका की रक्षा के लिए पहली चेतावनी रेखा (अर्ली वॉर्निंग लाइन) का काम करता है। यही कारण है कि ओटावा वर्तमान में अपने आर्कटिक निगरानी रडार, डीप-वाटर पोर्ट्स और तटीय क्षमताओं के आधुनिकीकरण में भारी निवेश कर रहा है। अमेरिका भी अपने अलास्का राज्य के जरिए आर्कटिक क्षेत्र में मजबूत मौजूदगी रखता है, जिससे दोनों देश एक-दूसरे की भौगोलिक सुरक्षा पर अनिवार्य रूप से निर्भर हैं।

नोराड (NORAD) का सुरक्षा जाल और भविष्य की कूटनीतिक दिशा

सैन्य क्षमताओं, बजट और हथियारों के मामले में इतना विशाल और एकतरफा अंतर होने के बावजूद, वास्तविकता यह है कि अमेरिका और कनाडा की रक्षा प्रणालियां तकनीकी और सामरिक रूप से एक-दूसरे के भीतर बहुत गहराई से गुंथी हुई हैं। शीत युद्ध के दौर में स्थापित नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) दोनों देशों की संयुक्त कमान है, जो पूरे उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप के हवाई क्षेत्र, उपग्रह निगरानी और समुद्री रास्तों की साझी निगरानी करती है। किसी भी संभावित बाहरी मिसाइल या हवाई हमले की स्थिति में दोनों देशों के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम एक एकीकृत नेटवर्क के रूप में प्रतिक्रिया देते हैं। यद्यपि प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बयान ने दोनों मित्र देशों के बीच एक अत्यंत संवेदनशील, दुर्लभ और अप्रत्याशित कूटनीतिक तनाव को उजागर किया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि साझा इतिहास, आर्थिक निर्भरता और एकीकृत सुरक्षा ढांचे को देखते हुए दोनों देश आने वाले समय में भी एक-दूसरे के सबसे अपरिहार्य और घनिष्ठ सहयोगी बने रहेंगे।