
News India Live, Digital Desk : मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को चिंता में डाल दिया है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल की आशंका के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने देश के हितों को सर्वोपरि रखते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी भी दबाव में नहीं आएगा।भारत के लिए देशहित पहले: जयशंकरहाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और युद्ध के हालातों के बावजूद भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, “हम वहीं से कच्चा तेल आयात करेंगे जहाँ से हमें यह सस्ता और किफायती दरों पर मिलेगा।”यह बयान उस समय आया है जब वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है। जयशंकर ने संकेत दिया कि भारत अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) को बरकरार रखेगा और किसी भी देश के प्रतिबंधों या अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे नहीं झुकेगा।ईरान-इजरायल संघर्ष और तेल का बाजारईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ता है। चूँकि ईरान तेल का एक बड़ा उत्पादक है और यह क्षेत्र प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) के करीब है, इसलिए युद्ध की स्थिति में कच्चे तेल के दाम $100 प्रति बैरल के पार जाने का डर है। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक तेल आयात करता है, ऐसे में कीमतों में मामूली बढ़ोत्तरी भी भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर भारी पड़ सकती है।रूस के बाद अब किस पर नजर?इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी भारत ने पश्चिमी देशों के दबाव को दरकिनार करते हुए रूस से भारी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीदा था। जयशंकर के इस ताजा बयान से साफ है कि भारत अपनी पुरानी नीति पर कायम है। चाहे वह रूस हो, खाड़ी देश हों या कोई अन्य स्रोत, भारत अपनी इकोनॉमी को स्थिर रखने के लिए ‘बेस्ट डील’ की तलाश में रहेगा।
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