
पेरिस का दुनियात प्रसिद्ध एफिल टावर एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है, लेकिन इस बार वजह कोई पर्यटन रिकॉर्ड नहीं बल्कि एक गंभीर प्रशासनिक और लैंगिक विवाद है। फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित इस आइकॉनिक स्मारक के संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाली कंपनी 'सोसिएते डी एक्सप्लॉयटेशन डे ला टूर एफिल' (SETE) के डायरेक्टर जनरल पैट्रिक ब्रैंको रुइवो (Patrick Branco Ruivo) को अपने पद से हाथ धोना पड़ा है। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर यह ऐलान कर दिया है कि रुइवो साल 2026 के अंत तक अपना पद छोड़ देंगे। यह पूरा घटनाक्रम सितंबर महीने की शुरुआत में तब शुरू हुआ था जब बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) से जुड़े लगभग 100 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल एफिल टावर के दौरे पर पहुंचा था। इस विजिट के दौरान सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था के नाम पर महिला कर्मचारियों को उनके तय कार्यस्थलों से हटाए जाने का गंभीर मामला सामने आया था, जिसके बाद फ्रांस की श्रम यूनियनों और राजनीतिक गलियारों में भारी भूचाल आ गया था।
BAPS प्रतिनिधिमंडल के दौरे पर महिला कर्मचारियों को हटाने का आरोप
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, BAPS संस्था पेरिस के पास बने एक भव्य और पारंपरिक हिंदू पत्थर के मंदिर के उद्घाटन समारोह के सिलसिले में फ्रांस आई थी। इसी धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के तहत 5 सितंबर को संगठन से जुड़ा एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल एफिल टावर घूमने पहुंचा था। आरोप यह लगा कि इस वीआईपी डेलीगेशन की आवाजाही के दौरान टॉवर पर तैनात महिला कर्मचारियों को उनके वर्कस्टेशन से हटने का निर्देश दिया गया था और कुछ जगहों पर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया था। इतना ही नहीं, महिला स्टाफ को यह भी हिदायत दी गई थी कि वे प्रतिनिधिमंडल के तय रास्ते या आसपास के परिसरों से न गुजरें। इस घटना के सामने आने के बाद एफिल टावर की आंतरिक यूनियन और महिला कर्मचारियों ने इसे अपने आत्मसम्मान और लैंगिक समानता (Gender Equality) के अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया, जिससे वहां काम करने वाले कर्मचारियों में भयंकर गुस्सा फैल गया।
कर्मचारियों की हड़ताल से ठप हुआ था एफिल टावर का कामकाज
मामले की गंभीरता तब और अधिक बढ़ गई जब 7 सितंबर को एफिल टावर के कर्मचारियों ने इस अलोकतांत्रिक और भेदभावपूर्ण रवૈये के खिलाफ अचानक काम बंद (Walkout) कर दिया और जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कर्मचारियों के इस कड़े रुख के चलते दुनिया के इस सबसे बड़े और लोकप्रिय पर्यटन स्थल को अचानक एक पूरे दिन के लिए बंद रखना पड़ा था। पर्यटकों को निराशा हाथ लगी और टावर के मुख्य द्वार पर ताला लटकाना पड़ा। स्थिति की नजाकत को देखते हुए पेरिस प्रशासन और मेयर ऐनी हिडाल्गो (Anne Hidalgo) की सरकार ने तुरंत इस पूरे मामले की स्वतंत्र आंतरिक जांच के आदेश दिए। जांच कमेटी की रिपोर्ट में यह बात खुलकर सामने आई कि दौरे की प्लानिंग और ऑपरेशनल स्तर पर भारी खामियां थीं, जिसके कारण महिला कर्मियों को उनके पदों से हटाया गया था। कंपनी ने खुद यह स्वीकार किया कि इस तरह की शर्तों और निर्देशों को स्वीकार करना प्रबंधन की एक बड़ी भूल थी।
BAPS संगठन की सफाई और कंपनी का नया कदम
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर BAPS संगठन की तरफ से भी प्रतिक्रिया सामने आई थी। संगठन का कहना था कि बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ आने के कारण पर्यटकों और सामान्य स्टाफ को कम से कम असुविधा हो, इसलिए प्रबंधन के साथ मिलकर सामान्य शिष्टाचार के तहत समन्वय किया गया था। संगठन ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी प्रकार की लैंगिक भावना को आहत करना या भेदभाव फैलाना बिल्कुल नहीं था और यदि इस पूरी प्रक्रिया से किसी को कोई मानसिक कष्ट या असुविधा हुई है, तो वे इसके लिए गहरा खेद व्यक्त करते हैं। बहरहाल, इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद ने यूरोपीय देशों में कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर एक लंबी बहस छेड़ दी है। SETE प्रबंधन ने अब भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए सख्त दिशा-निर्देश और जेंडर इक्वालिटी ट्रेनिंग प्रोग्राम लागू करने का ऐलान किया है, ताकि इस प्रकार की चूक दोबारा कभी न दोहराई जा सके।
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