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चीन ने बनाया AWACS का काल: हाइपरसोनिक मिसाइल से हवा में ही हजारों मील दूर तबाह होंगे जासूस विमान

आधुनिक युद्ध की तकनीक में हवा की ताकत और दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखने वाले एयरबॉर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम्स (AWACS) को किसी भी देश की वायु सेना की रीढ़ माना जाता है। लेकिन रक्षा तकनीक की दुनिया से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है जिसने दुनिया भर के महाशक्तियों की नींद उड़ा दी है। चीन ने एक ऐसी खतरनाक हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक को विकसित करने का दावा किया है जिसे विशेष तौर पर एडवांस्ड AWACS और हवा में उड़ने वाले जासूसी विमानों का काल यानी खात्मा करने के लिए डिजाइन किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यह नई हाइपरसोनिक एंटी-AWACS मिसाइल न केवल पारंपरिक रडार प्रणालियों को पूरी तरह चकमा देने में सक्षम है, बल्कि यह हजारों मील दूर आसमान में उड़ रहे सबसे सुरक्षित कहे जाने वाले कमांड सेंटर्स को भी पलक झपकते ही मलबे में बदल सकती है। इस अत्याधुनिक और घातक हथियार के सामने आने के बाद अब वैश्विक स्तर पर रक्षा रणनीतिकारों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई है, क्योंकि यह तकनीक भविष्य के हवाई युद्ध के समीकरणों को हमेशा के लिए बदलने की ताकत रखती है।

क्या होती है AWACS तकनीक और क्यों है यह किसी भी वायुसेना की सबसे बड़ी ताकत

किसी भी देश की वायु सेना के लिए AWACS यानी एयरबॉर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम एक उड़ते हुए किले की तरह काम करता है। विमान के ऊपरी हिस्से में लगा विशाल रडार डोम सैकड़ों किलोमीटर के दायरे में दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और ड्रोन की हर हरकत पर पैनी नजर रखता है। युद्ध के मैदान में कौन सा लड़ाकू विमान किधर से आ रहा है और जमीनी कमांड को क्या निर्देश देना है, यह सब तय करने में AWACS की भूमिका सबसे अहम होती है। अमेरिका, रूस, चीन और भारत जैसे देशों के पास आज ऐसे ही अत्याधुनिक जासूसी विमान मौजूद हैं जो आसमान में हवा के बीच ही अपने देश की सीमाओं की रक्षा का ताना-बाना बुनते हैं। जब दुश्मन का कोई विमान रडार की सीमा में प्रवेश करने की कोशिश करता है, तो ये सिस्टम तुरंत अलार्म बजा देते हैं। यही वजह है कि वायु सेना की रीढ़ कहे जाने वाले इन भारी-भरकम और बेहद कीमती विमानों को हमेशा दुश्मन की पहुंच से दूर और सबसे सुरक्षित घेरे में रखा जाता है।

चीन की नई हाइपरसोनिक मिसाइल और उसकी मारक क्षमता का खौफ

चीन द्वारा विकसित की गई इस नई एंटी-AWACS हाइपरसोनिक मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी अकल्पनीय रफ्तार और लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता है। हाइपरसोनिक हथियार आम तौर पर ध्वनि की गति से कम से कम 5 से 10 गुना (Mach 5 to Mach 10) ज्यादा रफ्तार से उड़ान भरते हैं, जिन्हें दुनिया की मौजूदा कोई भी आधुनिक एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम आसानी से इंटरसेप्ट नहीं कर पाती है। रक्षा वैज्ञानिकों के अनुसार, इस मिसाइल को विशेष रूप से उन ऊंचाइयों और दूरदराज के इलाकों को निशाना बनाने के लिए ट्यून किया गया है जहां AWACS विमान उड़ान भरते हैं। सामान्य तौर पर AWACS विमान अपनी सीमाओं के काफी अंदर सुरक्षित हवाई क्षेत्र में रहकर ऑपरेट करते हैं ताकि वे दुश्मन के फाइटर जेट्स की जद में न आएं। लेकिन चीन की यह नई हाइपरसोनिक मिसाइल अपनी बेजोड़ रेंज और सुपर-फास्ट स्पीड के दम पर हजारों मील का फासला कुछ ही मिनटों में तय करके इन 'फ्लाइंग कमांड सेंटर्स' को सीधे आसमान में ही नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखती है।

आधुनिक युद्ध नीति और ग्लोबल डिफेंस पर पड़ने वाला इसका दूरगामी असर

रक्षा और सामरिक मामलों के जानकारों का मानना है कि इस तरह के हथियारों का विकास भविष्य के युद्धों के तौर-तरीकों को पूरी तरह से उलट कर रख देगा। यदि आसमान में आंख और कान कहे जाने वाले AWACS विमान ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो वायु सेना के पायलटों के लिए दुश्मन के इलाके में जाकर ऑपरेशन चलाना बेहद जोखिम भरा हो जाएगा। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव को काउंटर करने के लिए चीन लगातार ऐसी विध्वंसक तकनीकों पर काम कर रहा है जो उसके विरोधियों के मुख्य सैन्य एडवांटेज को शून्य कर सकें। इस मिसाइल के सामने आने से अब दुनिया के बाकी देश भी काउंटर-हाइपरसोनिक डिफेंस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग तकनीकों को विकसित करने के लिए मजबूर हो गए हैं, ताकि आसमान में अपने सामरिक विमानों की सुरक्षा को पुख्ता किया जा सके।

भारत और पड़ोसी देशों की सुरक्षा पर इसका कितना गंभीर खतरा

भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर लगातार दोतरफा सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है, इस तरह की चीनी रक्षा तकनीक का विकास एक गंभीर रणनीतिक चिंता का विषय है। भारतीय वायु सेना (IAF) ने भी अपनी मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए स्वदेशी नेट-सेंट्रिक वॉरफेयर और आधुनिक AWACS (जैसे नेट्रा) प्रणालियों को अपने बेड़े में शामिल किया है। ऐसे में चीन की इस नई हाइपरसोनिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए भारत को अपनी हवाई सुरक्षा व्यवस्था, रडार नेटवर्क और अर्ली वार्निंग सिस्टम को और अधिक आधुनिक तथा बहु-स्तरीय बनाने की आवश्यकता है। रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि भारत को भी अपनी खुद की हाइपरसोनिक स्ट्राइक और डिफेंस क्षमताओं में तेजी लाने की जरूरत है ताकि दुश्मन की किसी भी दुस्साहसिक चाल का मुंहतोड़ और तत्काल जवाब दिया जा सके।