
News India Live, Digital Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार की कमर तोड़ने के लिए एक बेहद सख्त कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। इस नए आदेश के तहत क्यूबा को तेल की आपूर्ति करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका भारी-भरकम टैरिफ (अतिरिक्त शुल्क) लगा देगा। ट्रंप ने क्यूबा को ‘अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए असाधारण खतरा’ घोषित करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब हवाना को न तेल मिलेगा और न ही पैसा।ट्रुथ सोशल पर ट्रंप की हुंकार: ‘अब होगा जीरो तेल, जीरो पैसा’ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस फैसले का एलान करते हुए लिखा, “क्यूबा को अब कोई तेल या पैसा नहीं जाएगा – जीरो!” उन्होंने क्यूबा की सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यह राष्ट्र पूरी तरह विफल होने की कगार पर है और उनके पास अब केवल ‘सौदा’ करने का ही विकल्प बचा है। अमेरिका का आरोप है कि क्यूबा रूस, चीन और ईरान जैसे देशों के साथ मिलकर हमास और हिजबुल्लाह जैसे आतंकी संगठनों की मदद कर रहा है।मेक्सिको ने रोकी सप्लाई, लेकिन दी ‘मजबूरी’ की दलीलट्रंप के इस आदेश का असर तुरंत देखने को मिला है। मेक्सिको ने क्यूबा को होने वाली तेल की आपूर्ति को ‘अस्थायी’ रूप से रोक दिया है। हालांकि, मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाउम ने इसे अमेरिकी दबाव मानने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला ‘आवश्यकता’ के आधार पर लिया गया है और मेक्सिको की एकजुटता क्यूबा के साथ बनी रहेगी।क्यूबा के लिए बड़ा झटका: 44% तेल का स्रोत हुआ बंदवेनेजुएला से तेल की आपूर्ति पहले ही बंद हो चुकी थी, और अब मेक्सिको के इस कदम ने क्यूबा को गहरे संकट में डाल दिया है। आंकड़ों के अनुसार:मेक्सिको: क्यूबा के कुल तेल आयात का 44% हिस्सा देता था।वेनेजुएला: 33% तेल की आपूर्ति करता था (जनवरी 2025 से बंद)।रूस: लगभग 10% तेल भेज रहा है।मेक्सिको की सरकारी कंपनी ‘पेमेक्स’ प्रतिदिन औसतन 20,000 बैरल तेल क्यूबा भेज रही थी, जिसका रुकना क्यूबा की अर्थव्यवस्था के लिए ‘डेथ वारंट’ जैसा है।’अंतरराष्ट्रीय डकैती’ है अमेरिकी कदम- क्यूबा का पलटवारइस बीच, क्यूबाई राजनयिकों ने अमेरिका पर ‘कैरिबियन में अंतरराष्ट्रीय डकैती’ करने का आरोप लगाया है। 1959 की क्रांति के बाद क्यूबा अपने सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है। देश में ईंधन की कमी की वजह से घंटों बिजली कटौती हो रही है, जिससे खाद्य सामग्री और पानी की सप्लाई भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।क्या घुटने टेकेगा क्यूबा?विशेषज्ञों का मानना है कि ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ का इस्तेमाल कर ट्रंप ने क्यूबा की घेराबंदी कर दी है। यदि रूस या चीन ने सीधे तौर पर मदद नहीं की, तो क्यूबा में गृह युद्ध या सत्ता परिवर्तन जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। अमेरिका का यह कदम मेक्सिको और अन्य लैटिन अमेरिकी देशों के साथ उसके व्यापारिक संबंधों की भी परीक्षा लेगा।
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