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दिल्ली वालों को अभी और तरसाएगा मानसून, मौसम विभाग ने बताया राष्ट्रीय राजधानी में कब होगी एंट्री

दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर-पश्चिम भारत में भीषण गर्मी का प्रकोप झेल रहे लोगों के लिए एक बड़ी और थोड़ी मायूस करने वाली खबर है। देशभर में सुस्त रफ्तार से आगे बढ़ रहा दक्षिण-पश्चिम मानसून अब दिल्ली में भी अपने तय समय पर दस्तक नहीं दे पाएगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अनुमान के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में मानसून की एंट्री अगले हफ्ते होने की उम्मीद है। आमतौर पर दिल्ली में मानसून पहुंचने की तारीख 27 जून के आसपास मानी जाती है, लेकिन इस बार हवाओं का रुख और मौसमी सिस्टम इसका साथ नहीं दे रहे हैं।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हालांकि मानसून केरल में अपने सही समय पर पहुंच गया था, लेकिन पिछले कुछ सालों का ट्रेंड देखें तो इसे उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों तक पहुंचने में पहले के मुकाबले अधिक समय लग रहा है। आईएमडी ने 1961 से 2019 के बीच के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद मानसून के पहुंचने की सामान्य तारीखों में कुछ बदलाव भी किए हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि मानसून का मिजाज बदल रहा है।

इन राज्यों में भी बढ़ा इंतजार, सामान्य से 41 फीसदी कम बरसे बदरा

मानसून की धीमी चाल का असर सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सामान्य तौर पर मानसून को 26 जून तक चंडीगढ़, 27 जून तक दिल्ली, 28 जून तक जम्मू, 1 जुलाई तक जयपुर और 8 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेना चाहिए। मगर इस साल जमीनी हकीकत काफी अलग है। यह प्रायद्वीपीय और मध्य भारत के कई हिस्सों में अपने सामान्य समय से काफी पीछे चल रहा है।

हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मानसून की उत्तरी सीमा अभी सूरत, इंदौर, डाल्टनगंज और मोतिहारी तक ही पहुंच पाई है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अभी भी इसकी एंट्री नहीं हुई है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी में जुटे किसान बेहद चिंतित हैं। मानसून की इस बेरुखी की वजह से जून महीने में देशभर में सामान्य से करीब 41 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 2 जुलाई तक भी स्थिति में बहुत बड़ा सुधार होने की उम्मीद नहीं है और बारिश सामान्य से कम ही रहेगी।

मौसम विभाग का नया अपडेट: अगले 3-4 दिनों में यहां बदल सकता है मौसम

राहत की बात यह है कि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में मानसून के दोबारा एक्टिव होने की उम्मीद जताई है। आईएमडी के नए बुलेटिन के अनुसार, अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून के उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं। इसके बाद, यानी 2 जुलाई से मानसून धीरे-धीरे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बचे भागों के साथ-साथ उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और राजस्थान के कुछ और इलाकों की तरफ कदम बढ़ाएगा।

मानसून के आने में हो रही इस देरी ने उत्तर-पश्चिम भारत में गर्मी और उमस को चरम पर पहुंचा दिया है। उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में इस समय भीषण लू (Heatwave) चल रही है। प्रयागराज में पारा 43 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है, जो सामान्य से 4 से 5 डिग्री ज्यादा है। दिल्ली की बात करें तो यहां दिन और रात दोनों ही समय लोग उमस भरी गर्मी से बेहाल हैं। दिन का अधिकतम तापमान 37 से 40 डिग्री और रात का न्यूनतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। हालांकि, बीच-बीच में चलने वाली तेज धूलभरी हवाओं और हल्की आंधी से तापमान में मामूली गिरावट आती है, लेकिन वह फौरी राहत ही साबित हो रही है। आने वाले दिनों में भी दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

अल नीनो ने बिगाड़ा खेल, जून से सितंबर तक दिख सकता है बड़ा असर

इस साल मानसून की इस सुस्ती के पीछे मौसम वैज्ञानिक 'अल नीनो' (El Nino) के बढ़ते प्रभाव को मुख्य वजह मान रहे हैं। एक्सपर्ट्स ने पुष्टि की है कि प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में अल नीनो की स्थिति पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है। समुद्र की सतह का तापमान (SST) बढ़ने के कारण वैश्विक हवाओं के पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है, जिसका सीधा असर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ रहा है।

मौसम विभाग के मुताबिक, जून से सितंबर तक चलने वाले इस मानसूनी सीजन के दौरान अल नीनो का यह प्रभाव और ज्यादा मजबूत हो सकता है। आईएमडी ने अपने शुरुआती लॉन्ग रेंज फोरकास्ट में भी इस बात का अंदेशा जताया था कि इस साल देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश देखने को मिल सकती है। ऐसे में कई राज्यों में मानसून का सीजन कमजोर रहने की आशंका अब सच साबित होती दिख रही है, जो कृषि और जल संकट के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बन सकता है।