
आज के दौर में जब शेयर मार्केट कभी रॉकेट बन जाता है तो कभी अचानक धड़ाम से नीचे गिर जाता है, ऐसे में अपने पूरे पैसे को सिर्फ एक ही जगह लगाना समझदारी नहीं है। समझदार निवेशक अब एक नया और सुरक्षित रास्ता चुन रहे हैं, जिसे Multi-Asset Investing कहा जाता है। अगर आप भी अपने निवेश पर बिना बड़ा जोखिम लिए बंपर रिटर्न कमाना चाहते हैं, तो यह स्मार्ट पोर्टफोलियो स्ट्रेटेजी आपके बहुत काम आने वाली है।
क्या है मल्टी-एसेट इन्वेस्टिंग का असली गेम?
मल्टी-एसेट इन्वेस्टिंग का सीधा सा मतलब है अपने पैसे को किसी एक टोकरी में रखने के बजाय अलग-अलग एसेट क्लास जैसे—इक्विटी (शेयर), डेट (फिक्स्ड इनकम/बॉन्ड्स) और गोल्ड (सोना) में बांट देना। जब शेयर मार्केट में गिरावट आती है, तो अक्सर सोना चमकने लगता है, और डेट फंड्स आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता देते हैं। यह कॉम्बिनेशन आपके नुकसान के रिस्क को लगभग ना के बराबर कर देता है और लंबी अवधि में तगड़ा मुनाफा कमा कर देता है।
इक्विटी, डेट और गोल्ड का परफेक्ट कॉम्बिनेशन कैसे बनाएं?
एक आइडियल और स्मार्ट पोर्टफोलियो बनाने के लिए आपको अपनी उम्र और रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से एसेट्स का चुनाव करना चाहिए। एसेट एलोकेशन के इस नियम को आप आसानी से समझ सकते हैं:
-
इक्विटी (शेयर बाजार): अपने पोर्टफोलियो का 50 से 60 फीसदी हिस्सा अच्छे शेयर्स या म्यूचुअल फंड्स में लगाएं, जो आपको लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन (तगड़ा रिटर्न) करके देगा।
-
डेट फंड्स (सुरक्षित निवेश): पोर्टफोलियो का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा डेट या सरकारी बॉन्ड्स में रखें। यह मार्केट के उतार-चढ़ाव के समय आपके पैसों को सुरक्षा देगा और रेगुलर इनकम का जरिया बनेगा।
-
गोल्ड (सोना): कम से कम 10 से 15 फीसदी निवेश सोने (Digital Gold या SGB) में जरूर करें। संकट के समय सोना हमेशा सबसे बेहतरीन ढाल साबित होता है।
रीबैलेंसिंग है सबसे जरूरी कदम
मल्टी-एसेट पोर्टफोलियो बनाने के बाद उसे भूलना नहीं है। साल में कम से कम एक बार अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा यानी 'रीबैलेंसिंग' जरूर करें। उदाहरण के लिए, अगर शेयर मार्केट बहुत ज्यादा बढ़ गया है और आपके पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा तय सीमा से ज्यादा हो गया है, तो मुनाफे का कुछ हिस्सा निकालकर उसे गोल्ड या डेट में शिफ्ट कर दें। यही स्मार्ट इन्वेस्टिंग का सबसे बड़ा सीक्रेट है।
UK News