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पूर्व मंत्री का बड़ा दावा असीम मुनीर ही देश के असली बॉस, ट्रंप और शरीफ के बीच सीक्रेट प्लान

News India Live, Digital Desk: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने दक्षिण एशिया से लेकर खाड़ी देशों तक खलबली मचा दी है। पाकिस्तान के एक पूर्व मंत्री ने दावा किया है कि पाकिस्तान अब अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा पाकिस्तान की सत्ता संरचना को लेकर किया गया है, जिसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ नहीं, बल्कि सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ही देश के ‘डी-फैक्टो’ (वास्तविक) लीडर हैं और वही इस पूरे वैश्विक खेल की कमान संभाल रहे हैं।ट्रंप प्रशासन और असीम मुनीर के बीच बन रही नई धुरीदावे के मुताबिक, वाशिंगटन में सत्ता परिवर्तन के बाद पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व और अमेरिकी प्रशासन के बीच बातचीत के नए दौर शुरू हुए हैं। पूर्व मंत्री का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन के साथ जनरल असीम मुनीर के सीधे संपर्क हैं। पाकिस्तान अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर अमेरिका और ईरान के तनावपूर्ण रिश्तों को कम करने के लिए ‘पुल’ का काम करना चाहता है। जानकारों का कहना है कि अगर यह मध्यस्थता सफल होती है, तो पाकिस्तान को आर्थिक मदद और अंतरराष्ट्रीय मंच पर खोई हुई साख वापस मिल सकती है।शहबाज शरीफ सिर्फ चेहरा, असली फैसले सेना के हाथ में?इस रिपोर्ट में पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर भी तीखा कटाक्ष किया गया है। पूर्व मंत्री ने स्पष्ट कहा कि दुनिया को दिखाने के लिए भले ही शहबाज शरीफ प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं, लेकिन अहम रणनीतिक और विदेशी मामलों के फैसले रावलपिंडी (सेना मुख्यालय) से ही होते हैं। पाकिस्तान की सेना इस समय अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने के लिए बेताब है, ताकि देश की चरमराती अर्थव्यवस्था को संभाला जा सके। ईरान के साथ पाकिस्तान के ऐतिहासिक और सीमा साझा करने वाले संबंध इस मध्यस्थता के दावे को और भी वजन देते हैं।अमर उजाला विशेष: क्या पाकिस्तान का दांव होगा सफल?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के लिए अमेरिका और ईरान जैसे दो धुर विरोधियों के बीच तालमेल बिठाना ‘आग पर चलने’ जैसा है। एक तरफ जहां अमेरिका ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ चीन का बढ़ता प्रभाव पाकिस्तान को संभलकर चलने पर मजबूर कर रहा है। असीम मुनीर को ‘असली नेता’ बताए जाने से यह भी साफ होता है कि पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थिति अभी भी सेना के साये में है। अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान की इस पेशकश को गंभीरता से लेता है या यह सिर्फ एक और राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाएगी।