News India Live, Digital Desk: बिहार में सत्ता परिवर्तन के साथ ही 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी नई एनडीए (NDA) सरकार में शामिल उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) ने इस कानून की समीक्षा करने और इसे समाप्त करने की पुरजोर मांग उठाई है।माधव आनंद का ‘क्रांतिकारी’ बयान: “बिहार को राजस्व की जरूरत”गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद आरएलएम विधायक माधव आनंद ने मीडिया से मुखातिब होते हुए शराबबंदी पर कड़ा प्रहार किया। उनके बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:राजस्व की भारी हानि: माधव आनंद ने एक अर्थशास्त्री के तौर पर तर्क दिया कि शराबबंदी के कारण बिहार को हर साल लगभग 28 से 30 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि “विकसित बिहार” बनाने के लिए फंड की सख्त जरूरत है, जो इस कानून की वजह से दूसरे राज्यों में जा रहा है।जागरूकता बनाम पाबंदी: विधायक ने कहा कि शराबबंदी कोई स्थायी समाधान नहीं है। सरकार को पाबंदी के बजाय लोगों में जागरूकता पैदा करने पर ध्यान देना चाहिए।Implementation में विफलता:** उन्होंने आरोप लगाया कि शराबबंदी के बावजूद राज्य में जहरीली शराब से मौतें हो रही हैं और अवैध शराब का एक बड़ा आपराधिक नेटवर्क तैयार हो गया है।नीतीश युग का अंत और नए समीकरणनीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद यह पहली बार है जब सत्ता पक्ष के ही किसी सहयोगी ने उनके ‘मास्टरस्ट्रोक’ माने जाने वाले इस कानून पर इतना बड़ा सवाल खड़ा किया है।सम्राट चौधरी का रुख: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने फिलहाल इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है, लेकिन उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति और गवर्नेंस में सुधार को अपनी प्राथमिकता बताया है।गुजरात मॉडल की चर्चा: राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि नई सरकार बिहार में ‘गुजरात मॉडल’ की तर्ज पर शराबबंदी कानून में संशोधन कर सकती है, जिससे राजस्व भी बढ़े और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा मिले।बिहार में शराबबंदी: एक नजर में (2016-2026)लागू तिथि: अप्रैल 2016 (नीतीश कुमार सरकार द्वारा)।कार्रवाई: पिछले 10 वर्षों में लाखों लोग जेल भेजे गए और करोड़ों लीटर शराब जब्त की गई।चुनौतियां: जहरीली शराब के कारण मोतिहारी, सारण और पटना जैसे जिलों में समय-समय पर हुई सामूहिक मौतें।ताजा स्थिति: 2026 की पहली तिमाही में ही रोजाना औसतन 12 हजार लीटर अवैध शराब पकड़ी जा रही है, जो कानून के क्रियान्वयन पर सवालिया निशान लगाती है।माधव आनंद की इस मांग के बाद अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या बिहार फिर से ‘वेट स्टेट’ बनेगा या कानून में केवल ढील दी जाएगी, यह आने वाले समय में साफ होगा।
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