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ब्रिक्स के मंच से पुतिन का G-7 पर तीखा हमला: बोले- ‘सो-कॉल्ड’ G-7 से कहीं आगे निकला ब्रिक्स, दुनिया की 40% जीडीपी हमारे पास

नई दिल्ली के 'भारत मंडपम' में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन को संबोधित करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों के प्रभाव वाले संगठन जी-7 (G-7) पर तीखा प्रहार किया। वैश्विक अर्थव्यवस्था में पश्चिमी देशों के घटते प्रभाव और विकासशील देशों के तेजी से बढ़ते दबदबे को रेखांकित करते हुए पुतिन ने कहा कि अब दुनिया की वास्तविक आर्थिक ताकत पश्चिमी ब्लॉक के पास नहीं, बल्कि ब्रिक्स (BRICS) देशों के पास है।

पुतिन ने चुटकी लेते हुए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के समूह को 'तथाकथित जी-7' (So-called G7) करार दिया और कहा कि वह समझ नहीं पाते कि उन्हें अब भी 'ग्रुप ऑफ सेवन' क्यों कहा जाता है, जबकि वैश्विक विकास में उनका योगदान लगातार सिमट रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष आर्थिक तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर ब्रिक्स ने क्रय शक्ति समानता यानी परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP) के मामले में पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं को काफी पहले ही पीछे छोड़ दिया है।

आंकड़ों से समझाया फर्क: 40% बनाम 29% की जीडीपी हिस्सेदारी

रूसी राष्ट्रपति ने वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (Global GDP) के तुलनात्मक आंकड़े पेश करते हुए बताया कि कैसे पिछले पांच वर्षों में वैश्विक संतुलन पूरी तरह बदल चुका है:

  • वैश्विक जीडीपी में 40% हिस्सेदारी: पुतिन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में वैश्विक जीडीपी में 40 प्रतिशत से अधिक का योगदान ब्रिक्स देशों ने दिया है, जबकि तथाकथित जी-7 की हिस्सेदारी घटकर महज 29 प्रतिशत के आसपास रह गई है।

  • विकास दर में भारी अंतर: पिछले 5 वर्षों में वैश्विक आर्थिक विकास (Global Growth) का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले ब्रिक्स देशों के खाते में दर्ज हुआ है, जबकि जी-7 देश इस विकास में केवल 18 प्रतिशत का ही योगदान दे सके हैं।

  • भविष्य की ग्रोथ प्रोजेक्शन: पुतिन ने अनुमान जताया कि आने वाले समय में जहां जी-7 देशों की औसत विकास दर मुश्किल से 1.1 से 1.2 प्रतिशत प्रति वर्ष रहने का अनुमान है, वहीं ब्रिक्स देशों की औसत अर्थव्यवस्था 3.8 से 4 प्रतिशत से अधिक की दर से आगे बढ़ेगी।

दुनिया की आधी आबादी और उभरती राष्ट्रीय कंपनियां: भारत की कंपनियों की तारीफ

ब्रिक्स देशों की इस तेज आर्थिक छलांग के पीछे की वजह बताते हुए पुतिन ने कहा कि इसका जवाब बेहद सीधा और स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि विस्तारित ब्रिक्स देशों के पास दुनिया की आधी से अधिक आबादी है। इस विशाल जनसंख्या के कारण हमारे पास मजबूत, गतिशील और असीम संभावनाओं से भरे घरेलू बाजार हैं। हमारे देशों में तेजी से शहरीकरण (Urbanisation) हो रहा है और मध्यम वर्ग का दायरा बढ़ रहा है।

अपने भाषण के दौरान पुतिन ने ब्रिक्स देशों की घरेलू कंपनियों की वैश्विक सफलता का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने भारत की प्रमुख ऑटोमोबाइल और टेक कंपनी महिंद्रा (Mahindra), चीन की हुआवेई (Huawei), ब्राजील की एम्ब्रेयर (Embraer), यूएई की डीपीओ (DPO) और रूस की रोसाटॉम (Rosatom) का नाम लेते हुए कहा कि ये कंपनियां साबित कर रही हैं कि वे पश्चिमी कंपनियों को पछाड़कर दुनिया का नेतृत्व करने में पूरी तरह सक्षम हैं। उन्होंने भारत को आईटी और सॉफ्टवेयर उद्योग का वैश्विक पावरहाउस बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी सराहना की।

प्रतिबंधों की नीति फेल: डी-डॉलराइजेशन और राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार

पुतिन ने पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जाने वाले एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि किसी भी संप्रभु देश को यह डिक्टेट नहीं किया जा सकता कि उसे किससे क्या खरीदना चाहिए और किससे व्यापार करना चाहिए। भारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखकर फैसले करता है और किसी भी प्रकार की प्रतिबंधों की धमकी सीधे बूमरैंग (उलटी) साबित होती है।

रूसी राष्ट्रपति ने दोहराया कि ब्रिक्स देश अब आपसी व्यापार को अमेरिकी डॉलर के बजाय अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (रुपया, रूबल, युआन और दिरहम) में निपटाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। नई दिल्ली में ब्रिक्स के वित्तीय सिस्टम और सीमा-पार भुगतान तंत्र को मजबूत करने की इस पहल से वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में एक बहुध्रुवीय (Multipolar) संतुलन स्थापित हो रहा है, जिसने जी-7 देशों के एकाधिकार को हमेशा के लिए चुनौती दे दी है।