
पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस समय की एक बेहद सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक गढ़ में सेंधमारी की खबरें लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। ताजा घटनाक्रम में राज्यसभा के भीतर दीदी के साथ एक ऐसा बड़ा 'खेला' हो गया है, जिसने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को चिंता में डाल दिया है। कभी संसद के उच्च सदन में अपनी मजबूत उपस्थिति का गुरूर रखने वाली टीएमसी के सांसदों का आंकड़ा अब बदल चुका है। राज्यसभा में ममता बनर्जी के 13 सांसदों के मजबूत कुनबे में से 3 सांसदों का साथ अब छूट गया है, जिसके बाद विपक्ष को दीदी पर तंज कसने का एक बड़ा मौका मिल गया है।
जानिए कैसे और कहां बिगड़ा टीएमसी का राज्यसभा समीकरण
संसदीय गलियारों से मिल रही इनपुट के अनुसार, राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 13 सदस्य थे, जो संसद के भीतर ममता बनर्जी की ताकत और उनकी राजनीतिक हनक को दर्शाते थे। लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों, दलबदल और कुछ सीटों पर आए बड़े बदलावों के चलते 3 सांसदों के समीकरण पार्टी के हाथ से फिसल गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल सीटों का नुकसान नहीं है, बल्कि यह ममता बनर्जी की राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकजुटता और अपनी पार्टी पर पकड़ को लेकर भी एक बड़ा संकेत है। इस बड़े झटके के बाद अब बंगाल से लेकर दिल्ली तक इस बात की चर्चाएं तेज हैं कि क्या आगामी दिनों में टीएमसी को कुछ और झटके लग सकते हैं।
कौन से हैं वो 10 सांसद जो इस मुश्किल वक्त में भी दीदी के साथ डटे हैं
इस बड़े सियासी उलटफेर के बाद अब हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्यसभा में ममता बनर्जी के वे कौन से 10 वफादार और दिग्गज सांसद हैं, जो अभी भी दीदी के खेमे में मजबूती से खड़े हैं। बचे हुए सांसदों की सूची में पार्टी के कुछ सबसे प्रखर और अनुभवी चेहरे शामिल हैं, जो संसद के भीतर लगातार मोदी सरकार को घेरने का काम करते रहे हैं। इनमें डेरेक ओ'ब्रायन, सुखेंदु शेखर रॉय, साकेत गोखले, और सागरिका घोष जैसे बड़े और चर्चित नाम शामिल हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन 10 सांसदों के भरोसे ममता बनर्जी अभी भी उच्च सदन में अपनी आवाज को बुलंद रखने का दम भर रही हैं, लेकिन 3 साथियों का अचानक कम होना पार्टी के लिए एक वेक-अप कॉल की तरह है।
बंगाल की राजनीति पर क्या होगा इस सियासी 'खेले' का असर
राज्यसभा में हुए इस बड़े बदलाव का असर केवल संसद तक ही सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि इसका सीधा असर पश्चिम बंगाल की घरेलू राजनीति पर भी देखने को मिलेगा। भारतीय जनता पार्टी (BJP) सहित अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर ममता बनर्जी सरकार पर हमलावर हो गए हैं। विपक्ष का दावा है कि दीदी का राजनीतिक रसूख और उनका पुराना गुरूर अब धीरे-धीरे बिखर रहा है। वहीं दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस के रणनीतिकारों ने इस डैमेज को कंट्रोल करने के लिए अपनी नई योजना पर काम करना शुरू कर दिया है ताकि बचे हुए सांसदों को एकजुट रखा जा सके और आगामी चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं के मनोबल को टूटने से बचाया जा सके।
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