
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की वादियों में इस समय बारूद की गंध और बेगुनाहों की चीखें गूंज रही हैं। आटे की किल्लत, आसमान छूती बिजली की कीमतों और भारी टैक्स के खिलाफ महीनों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रही स्थानीय जनता पर पाकिस्तानी हुक्मरानों ने जुल्म का सबसे खौफनाक चेहरा दिखाया है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों, बुजुर्गों और युवाओं को तितर-बितर करने के नाम पर पाकिस्तानी रेंजरों और पंजाब पुलिस ने सीधे गोलियां बरसाईं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मुजफ्फराबाद और आसपास के इलाकों में सड़कों पर खून बिखरा नजर आया, जिसने इतिहास के सबसे काले पन्नों में शुमार जलियांवाला बाग हत्याकांड की यादें ताजा कर दीं। इस बर्बर कार्रवाई ने पूरी घाटी को सुलगने पर मजबूर कर दिया है।
'वर्दी के पीछे दहशतगर्दी' के नारों से गूंजा पीओके, आर्मी चीफ निशाने पर पाकिस्तानी फौज की इस दमनकारी नीति के खिलाफ पीओके की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा है। गुस्से से उबले प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना और वहां की सरकार के खिलाफ बेहद तीखे नारे लगाए। सड़कों पर 'ये जो दहशतगर्दी है, उसके पीछे वर्दी है' के नारे गूंज रहे हैं, जो सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना की दादागीरी को चुनौती दे रहे हैं। स्थानीय नागरिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता खुलेआम पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर की तुलना ब्रिटिश हुकूमत के क्रूर जनरल डायर से कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिस तरह डायर ने निहत्थों पर गोलियां चलवाई थीं, ठीक उसी तरह मुनीर के इशारे पर पाकिस्तानी जल्लाद और सुरक्षाबल अपने ही नागरिकों का शिकार कर रहे हैं।
इंटरनेट बंद और भारी पाबंदियां, कश्मीरी जनता ने आर-पार की जंग का किया एलान हालात को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए पाकिस्तानी प्रशासन ने पूरे पीओके में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं को पूरी तरह से ठप कर दिया है। इसके बावजूद स्थानीय आवामी एक्शन कमेटी के आह्वान पर लाखों लोग सड़कों पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि अब यह लड़ाई सिर्फ सस्ते आटे या बिजली की नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना के जुल्मों से आजादी और आत्मसम्मान की बन चुकी है। जगह-जगह सैन्य वाहनों को रोकने और सरकारी संपत्तियों पर गुस्सा निकालने की खबरें आ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की बदहाल आर्थिक स्थिति और मानवाधिकारों का यह खुला उल्लंघन आने वाले दिनों में इस्लामाबाद के लिए बड़ी अंतरराष्ट्रीय फजीहत की वजह बनने जा रहा है।
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