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युद्ध के मैदान में 51 नागरिकों की मौत, 139 को किया गया डिस्चार्ज; विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और कूटनीतिक गलियारों से इस वक्त देश के नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर खबर सामने आ रही है। रूस की सेना में धोखे से या अनुबंध के तहत शामिल किए गए भारतीय नागरिकों को लेकर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) ने संसद और सार्वजनिक मंचों पर आधिकारिक आंकड़े साझा किए हैं। विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, रूसी सेना के साथ रूस-यूक्रेन युद्ध मोर्चे पर तैनात किए गए कुल 51 भारतीय नागरिकों की अब तक दुखद मौत हो चुकी है। इसके अलावा, भारत सरकार के निरंतर और कड़े कूटनीतिक प्रयासों के बाद इनमें से 139 नागरिकों को रूसी सेना से सुरक्षित डिस्चार्ज करा लिया गया है और उन्हें वापस स्वदेश लाने की प्रक्रिया पूरी की गई है या वे लौट आए हैं। इस संवेदनशील मामले ने देश भर में चिंता की लहर पैदा कर दी है, क्योंकि रोजगार की तलाश में विदेश गए भोले-भाले युवाओं को युद्ध के मुहाने पर धकेलने का यह पूरा मामला बेहद गंभीर रूप ले चुका है। आइए इस पूरे घटनाक्रम, विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान और इसके कूटनीतिक आयामों को विस्तार से समझते हैं।

कैसे जालसाजी का शिकार बने भारतीय युवा और रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे

यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब देश के अलग-अलग राज्यों से कई युवाओं ने सोशल मीडिया और अपने परिवारों के जरिए यह गुहार लगाई कि उन्हें रूस में अच्छी तनख्वाह वाली सुरक्षा नौकरियों या सहायक कार्यों का झांसा देकर बुलाया गया था। मॉस्को पहुंचने के बाद एजेंटों और ट्रेवल माफियाओं ने कथित तौर पर उनके पासपोर्ट और कागजात अपने कब्जे में ले लिए और उन्हें बलपूर्वक रूसी सेना के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर कर दिया। इन युवाओं को बिना किसी युद्ध कौशल या पर्याप्त सैन्य प्रशिक्षण के सीधे रूस-यूक्रेन युद्ध के खतरनाक मोर्चों पर भेज दिया गया, जहां गोलाबारी और हमलों के बीच कई जवान असमय काल के गाल में समा गए। जैसे ही इस धोखाधड़ी और जबरन भर्ती के मामले भारतीय मीडिया और परिवारों के सामने आए, सरकार पर भारी दबाव बना कि वह रूसी प्रशासन के साथ उच्च स्तर पर इस मुद्दे को उठाए और वहां फंसे प्रत्येक भारतीय नागरिक की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करे।

विदेश मंत्रालय की सख्त कार्रवाई और 139 नागरिकों का सफल डिस्चार्ज

मामले की गंभीरता को समझते हुए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और मास्को स्थित भारतीय दूतावास ने बेहद आक्रामक और सक्रिय कूटनीति का परिचय दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता और उच्च अधिकारियों ने लगातार रूसी समकक्षों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार के सामने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। भारत की तरफ से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि रूसी सेना में सेवारत किसी भी भारतीय नागरिक को जबरन युद्ध में रखना द्विपक्षीय संबंधों के अनुकूल नहीं है। इन निरंतर कूटनीतिक वार्ताओं और बैठकों का ही परिणाम रहा कि रूस ने भारतीय पक्ष की बात को गंभीरता से लेते हुए अनुबंध समाप्त किए और अब तक कुल 139 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना से आधिकारिक रूप से डिस्चार्ज कर दिया है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया है कि जो नागरिक सुरक्षित लौट आए हैं, उनके पुनर्वास और एजेंटों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने के लिए सीबीआई तथा अन्य जांच एजेंसियां देश भर में बड़े पैमाने पर छापेमारी और कार्रवाई कर रही हैं ताकि मानव तस्करी करने वाले इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट का पूरी तरह से सफाया किया जा सके।

युद्ध के मैदान में जान गंवाने वाले 51 भारतीयों के परिवारों के लिए सहायता और सरकार का रुख

इस पूरी त्रासदी का सबसे दुखद पहलू यह है कि रूसी सेना की तरफ से लड़ते हुए या वहां हुए हमलों में कम से कम 51 भारतीय नागरिकों ने अपनी जान गंवा दी है। विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि करते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की है और कहा है कि सरकार मृतकों के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द उनके पैतृक गांवों और शहरों तक पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। इसके साथ ही, मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास रूसी प्रशासन के संपर्क में है ताकि मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा और बीमा राशि का भुगतान समय पर मिल सके। भारत सरकार ने देश के सभी नागरिकों के लिए एक बार फिर कड़ी एडवाइजरी जारी करते हुए चेतावनी दी है कि वे सोशल मीडिया या अनधिकृत एजेंटों के माध्यम से रूस या अन्य संघर्षग्रस्त देशों में मिलने वाली संदिग्ध नौकरियों के झांसे में बिल्कुल न आएं। विदेश मंत्रालय के इस कड़े और पारदर्शी रुख ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया के किसी भी कोने में यदि कोई भारतीय संकट में फंसता है, तो देश की सरकार उसकी सुरक्षा के लिए पूरी ताकत के साथ खड़ी है।