
देश में आगामी परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया और महिला आरक्षण को लेकर दक्षिण भारत से एक बहुत बड़ा और स्पष्ट राजनीतिक संदेश सामने आया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने परिसीमन के संवेदनशील मुद्दे पर राज्य सरकार का रुख पूरी तरह से स्पष्ट करते हुए केंद्र सरकार के सामने एक मजबूत मांग रखी है। सीएम स्टालिन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि देश में लोकसभा सीटों की कुल संख्या 543 ही रहनी चाहिए और आबादी के आधार पर राज्यों के बीच सीटों का संतुलन नहीं बिगड़ना चाहिए, साथ ही उन्होंने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को भी पूरी ईमानदारी से लागू करने की पुरजोर वकालत की है।
दक्षिण राज्यों की बढ़ी चिंताएं और परिसीमन का विवाद
पिछले कुछ समय से देश में लोकसभा सीटों के नए सिरे से परिसीमन को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिसके तहत जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिण भारतीय राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश) को यह डर सता रहा है कि उनकी संसद में राजनीतिक ताकत और सीटें कम हो सकती हैं। सीएम स्टालिन ने इस आशंका पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कर दिया है कि जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को ईमानदारी से लागू करने वाले राज्यों को राजनीतिक रूप से दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि संसद में सीटों का आवंटन इस तरह से नहीं होना चाहिए जिससे संघवाद की भावना को आघात पहुंचे।
महिला आरक्षण और संतुलित विकास पर जोर
एक तरफ जहां परिसीमन को लेकर दक्षिण के राज्य सतर्क हैं, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री स्टालिन ने देश की आधी आबादी यानी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लाए गए 33% महिला आरक्षण विधेयक का पूर्ण समर्थन किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को उनका वास्तविक हक मिलना ही चाहिए, लेकिन यह सब देश के संघीय ढांचे और राज्यों के बीच आनुपातिक न्याय की कीमत पर नहीं होना चाहिए। तमिलनाडु सरकार के इस मुखर रुख ने राष्ट्रीय राजनीति में परिसीमन और महिला आरक्षण के समीकरणों को एक बार फिर से गर्मा दिया है, जिस पर अब तमाम राजनीतिक दलों की निगाहें टिकी हुई हैं।
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