
बिहार की सियासत में हर दिन कुछ नया और सनसनीखेज देखने को मिलता है। विधानसभा उपचुनाव या आगामी चुनावों के मतदान से ठीक पहले बांकीपुर से एक बहुत बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) बीती रात अचानक बीच-सड़क और सीधे थाने जा पहुंचे। आधी रात के वक्त थाने के भीतर पुलिसकर्मियों और प्रशांत किशोर के बीच तीखी बकझक और बहस का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है और हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर वोटिंग से ठीक पहले ऐसा क्या हुआ कि पीके को थाने का रुख करना पड़ा।
आधी रात को थाने का दरवाजा खटखटाने की क्यों पड़ी जरूरत
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में मतदान की सरगर्मी अपने चरम पर थी। इसी दौरान कुछ स्थानीय गतिविधियों और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर तनाव की स्थिति बन गई। कार्यकर्ताओं के साथ हो रही कथित ज्यादती या प्रशासनिक दबाव की सूचना मिलते ही प्रशांत किशोर खुद स्थिति का जायजा लेने के लिए रात के सन्नाटे में थाने पहुंच गए। थाने के अंदर मौजूद पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी तीखी बहस हुई। पीके ने दो टूक शब्दों में पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और चेतावनी दी कि चुनावी माहौल में किसी भी प्रकार की तानाशाही या पक्षपातपूर्ण रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिसर्किमयों के साथ तीखी तनातनी, समर्थकों की भीड़ हुई जमा
जैसे ही प्रशांत किशोर के थाने में मौजूद होने की खबर फैली, उनके समर्थक और स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में थाने के बाहर जुटने लगे। पुलिसकर्मियों और प्रशांत किशोर के बीच तीखे संवाद का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वे पूरी दृढ़ता के साथ नियमों और कानूनों का हवाला देते हुए नजर आ रहे हैं। इस घटना ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि चुनाव के मुहाने पर खड़े इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे से पुलिस और राजनीतिक दलों के बीच टकराव की स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई है।
बांकीपुर के चुनावी समीकरणों पर कितना पड़ेगा इस घटना का असर
बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर लगातार 'जन सुराज' अभियान के जरिए पारंपरिक पार्टियों को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में वोटिंग से ठीक पहले आधी रात का यह घटनाक्रम चुनावी समीकरणों को पूरी तरह प्रभावित कर सकता है। विपक्षी दल और जन सुराज के समर्थक इसे प्रशासन के दुरुपयोग से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं प्रशासनिक अमला भी अपनी सफाई देने में जुटा है। इस पूरी घटना के बाद बांकीपुर सीट पर मतदान के दौरान सुरक्षा और सतर्कता और अधिक बढ़ा दी गई है, और सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस सियासी घमासान का जनता के बीच क्या संदेश जाता है।
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