
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) करीब 600 अंकों की भारी गिरावट के साथ 77,600 के स्तर के पास आ गया। वहीं दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 (Nifty 50) भी लगभग 140 अंकों से ज्यादा टूटकर 24,200 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे फिसल गया। बाजार के इस रुख से ट्रेडर्स और रिटेल निवेशकों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि पिछले कारोबारी सत्र में बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ था।
प्राइवेट बैंकों के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव: HDFC और Axis Bank में बड़ी गिरावट
आज की इस मार्केट गिरावट में सबसे बड़ा विलेन बैंकिंग सेक्टर साबित हुआ है। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 2% से ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। हाल ही में सामने आए तिमाही नतीजों (Q1 Results) के बाद प्राइवेट बैंकों के मार्जिन पर दबाव देखा जा रहा है। दिग्गजों की बात करें तो एक्सिस बैंक (Axis Bank) के शेयरों में लगभग 5% से 6% तक का क्रैश देखा गया, जबकि देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank के शेयर भी 4.5% से ज्यादा टूट गए। इसके अलावा कोटक महिंद्रा बैंक और बजाज फाइनेंस के शेयरों ने भी बाजार को नीचे खींचने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
बाजार क्यों गिरा? इन 3 बड़े कारणों ने बिगाड़ा खेल
ग्लोबल मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घरेलू बाजार में इस बड़ी गिरावट के पीछे तीन मुख्य वजहें काम कर रही हैं। पहला कारण, वीकेंड पर आए बैंकिंग दिग्गजों के पहली तिमाही के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, जिससे निवेशकों ने जमकर प्रॉफिट बुकिंग की। दूसरा बड़ा कारण, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इरान के बीच जारी जियोपॉलिटिकल क्राइसिस के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। कच्चे तेल का महंगा होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निगेटिव माना जाता है क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने का डर रहता है। तीसरा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली है, जिससे लिक्विडिटी पर असर पड़ा है।
क्या है निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स की राय?
मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि निफ्टी के लिए 24,200 का स्तर बेहद अहम था, और इसके नीचे जाने पर बाजार में गिरावट और बढ़ सकती है जो निफ्टी को 24,000 या 23,800 के स्तर तक ले जा सकती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस गिरावट के बीच भी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में थोड़ी मजबूती देखी जा रही है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि इस उतार-चढ़ाव वाले माहौल में निवेशकों को हड़बड़ी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही धीरे-धीरे (SIP मोड में) खरीदारी करनी चाहिए।
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