
उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर दिल्ली का रास्ता तय करने वाले बड़े महामुकाबले की बिसात बिछ चुकी है। यूपी में राज्यसभा की 10 हाई-प्रोफाइल सीटों पर होने वाले आगामी चुनावों को लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक सरगर्मियां बेहद तेज हो गई हैं। क्रेडिबल एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन के मानकों के अनुसार, यह चुनाव केवल कुछ सांसदों को संसद भेजने का जरिया नहीं है, बल्कि आगामी विधानसभा और आम चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच अपनी ताकत दिखाने का सबसे बड़ा लिटमस टेस्ट है। इस महामुकाबले के लिए दोनों ही खेमों ने अपने गुप्त प्लान और सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले को पूरी तरह तैयार कर लिया है, जिसने कई मौजूदा सांसदों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
कई दिग्गजों का कट सकता है पत्ता, नए चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी
लखनऊ के राजनीतिक गलियारों और पार्टी सूत्रों से आ रही पुख्ता खबरों के मुताबिक, इस बार दोनों ही प्रमुख दलों में बड़े पैमाने पर टिकट काटे जाने की सुगबुगाहट है। बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि जो सांसद पिछले छह सालों में जमीन पर निष्क्रिय रहे हैं या जिनका फीडबैक नकारात्मक आया है, उनकी जगह नए, युवा और सामाजिक रूप से प्रभावशाली चेहरों को मौका दिया जाएगा। प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और पश्चिमी यूपी के कई ऐसे कद्दावर नेता जो पिछले कुछ समय से मुख्यधारा की राजनीति से दूर थे, वे अब संसद पहुंचने के लिए लखनऊ के चक्कर काट रहे हैं। कड़े आंतरिक सर्वे के बाद ही दोनों दल अपने उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाएंगे।
जानिए क्या है बीजेपी का मिशन और सोशल इंजीनियरिंग का गुप्त प्लान
संख्या बल के हिसाब से भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में सबसे मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। एनडीए (NDA) गठबंधन के पास इतनी सीटें हैं कि वे आसानी से अपनी अधिकांश सीटें सुरक्षित निकाल सकते हैं। बीजेपी के आंतरिक सूत्रों के मुताबिक, पार्टी का पूरा फोकस इस बार गैर-यादव ओबीसी (OBC), प्रबुद्ध वर्ग और दलित समाज के बड़े चेहरों को साधने पर है, ताकि आगामी चुनावों के लिए एक अचूक सामाजिक समीकरण तैयार किया जा सके। इसके अलावा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और गुर्जर समाज के साथ-साथ पूर्वांचल के भूमिहार और ब्राह्मण चेहरों को भी राज्यसभा भेजकर क्षेत्रीय संतुलन बनाने का मास्टरप्लान तैयार किया गया है।
अखिलेश यादव का 'पीडीए' फॉर्मूला देगा बीजेपी को कड़ी टक्कर
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस महामुकाबले के लिए अपनी घेराबंदी मजबूत कर दी है। सपा अपने पारंपरिक 'पीडीए' यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले को राज्यसभा चुनाव में भी पूरी तरह लागू करने जा रही है। अखिलेश यादव का प्लान बीजेपी के सवर्ण कार्ड के सामने मजबूत पिछड़े और अति-पिछड़े चेहरों को उतारने का है, ताकि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एक मजबूत संदेश दिया जा सके। इसके साथ ही, राज्यसभा चुनाव में किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी ने अपने विधायकों की कड़ी मॉनिटरिंग शुरू कर दी है और हर एक वोट का गणित बेहद बारीकी से सुलझाया जा रहा है।
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