
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क | वैश्विक ऊर्जा बाजार में आज सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया जब कच्चे तेल की कीमतें सोमवार की मामूली गिरावट को पीछे छोड़ते हुए एक बार फिर चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। मंगलवार, 7 अप्रैल की सुबह एशियाई बाजारों के खुलते ही वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) और ब्रेंट क्रूड दोनों में जोरदार उछाल देखा गया। यह तेजी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक ‘डेडलाइन’ ने निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।ईरान-US सीजफायर की खबरें निकलीं महज अफवाह?बाजार में पहले यह चर्चा थी कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर कोई सहमति बन सकती है, लेकिन ईरान ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान का स्पष्ट कहना है कि उसने युद्ध समाप्त करने के लिए अपनी शर्तें रख दी हैं, जो अब छठे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। इस स्पष्टीकरण के बाद कच्चे तेल की कीमतों को और सहारा मिला। फिलहाल US क्रूड (WTI) 113 डॉलर प्रति बैरल के आसपास टिका हुआ है, जबकि सोमवार को इसने 115 डॉलर का स्तर भी छुआ था। वहीं, वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है।ट्रंप की ‘पुल और पावर प्लांट’ वाली धमकी से बढ़ी घबराहटबाजार पर सबसे ज्यादा दबाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन सोशल मीडिया पोस्ट्स का है, जिसमें उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को खोलने के लिए सख्त डेडलाइन दी है। ट्रंप ने बेहद आक्रामक लहजे में कहा है कि अमेरिकी सेना “आज रात 12 बजे तक ईरान के हर महत्वपूर्ण पुल को नष्ट करने की क्षमता रखती है।” इतना ही नहीं, उन्होंने ईरान के पावर प्लांट्स को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी है। जानकारों का मानना है कि यदि ऐसी सैन्य कार्रवाई होती है, तो यह जेनेवा कन्वेंशन का खुला उल्लंघन होगा, लेकिन ट्रंप अपने बयानों पर अडिग नजर आ रहे हैं।जवाबी कार्रवाई को तैयार ईरान, ग्लोबल इकॉनमी पर खतराईरान ने भी ट्रंप की धमकियों के आगे झुकने से इनकार कर दिया है। ईरान की ओर से बयान आया है कि यदि अमेरिका ने कोई हिमाकत की, तो वे खाड़ी क्षेत्र (The Gulf) के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपने हमले तेज कर देंगे। अगर ऊर्जा सप्लाई की इस लाइफलाइन पर हमला होता है, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंच सकता है। एनवेरस के ऑयल और गैस एनालिस्ट कार्ल लैरी के मुताबिक, स्थिति बेहद नाजुक है और यदि मामला सैन्य एक्शन तक पहुंचा, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं।WTI प्रीमियम रिकॉर्ड स्तर पर, अमेरिकी तेल की मची लूटसप्लाई चेन में व्यवधान की आशंका के चलते विदेशी खरीदारों के बीच अमेरिकी कच्चे तेल को खरीदने की होड़ मच गई है। सोमवार को WTI का प्रॉम्प्ट स्प्रेड (दो करीबी कॉन्ट्रैक्ट्स का अंतर) 15.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जो अब तक के सबसे बड़े प्रीमियम के करीब है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी, तेल की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद बेहद कम है।
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