
News India Live, Digital Desk: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की भीषण परिस्थितियों के बीच दुनिया की लाइफलाइन कहे जाने वाले ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) को लेकर एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। हफ्तों से जारी नाकेबंदी और तनाव के बाद अब ईरान के रुख में नरमी के संकेत मिले हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के सामने एक अहम प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत वह होर्मुज के रास्ते जहाजों को सुरक्षित गुजरने की इजाजत दे सकता है। इस प्रस्ताव को वैश्विक ईंधन आपूर्ति बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।क्या है ईरान का ‘ओमान रूट’ वाला नया मास्टर प्लान?ईरानी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, तेहरान ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में उनकी मांगें मान ली जाती हैं, तो वे ओमान की तरफ वाले समुद्री हिस्से से जहाजों को बिना किसी हमले के खतरे के गुजरने देंगे। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों ने इस रास्ते पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भारी सैन्य तैनाती कर रखी है। हालांकि, इस ‘सेफ पैसेज’ के बदले ईरान ने कुछ गुप्त शर्तें भी रखी हैं, जिन पर अब बाइडन प्रशासन को फैसला लेना है।बारूदी सुरंगें और इजरायली जहाज: अब भी बरकरार हैं कई सवालभले ही ईरान ने बातचीत की मेज पर प्रस्ताव रखा हो, लेकिन अभी भी कई पेंच फंसे हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान समुद्र में बिछाई गई अपनी बारूदी सुरंगों को हटाएगा? इसके अलावा, क्या ईरान इजरायल से जुड़े जहाजों को भी इस रास्ते से सुरक्षित गुजरने देगा? दूसरी ओर, अमेरिकी नौसेना ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि वह नाकेबंदी लागू करने के लिए बल प्रयोग से पीछे नहीं हटेगी। ईरान ने भी दोटूक कहा है कि वह अपनी संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।पाकिस्तान की मध्यस्थता: असीम मुनीर पहुंचे तेहरानइस महायुद्ध को रोकने और दोनों देशों को फिर से वार्ता की मेज पर लाने के लिए पाकिस्तान पूरी ताकत लगा रहा है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा है। इस प्रतिनिधिमंडल में गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी शामिल हैं। यह दौरा तब हो रहा है जब पीएम शहबाज शरीफ सऊदी अरब और तुर्किये की यात्रा पर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि अगले दो दिनों में इस्लामाबाद में दूसरे दौर की निर्णायक वार्ता हो सकती है।क्या टल जाएगा वैश्विक तेल संकट?दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यदि ईरान और अमेरिका के बीच इस प्रस्ताव पर सहमति बन जाती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रही भारी उछाल थम सकती है। भारत जैसे देशों के लिए यह खबर किसी संजीवनी से कम नहीं है, क्योंकि हमारी ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक इसी रास्ते पर निर्भर है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद में होने वाली अगली बैठक पर टिकी हैं, जहां भविष्य के युद्ध या शांति का फैसला होगा।
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