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Vaishakh Amavasya 2026 : शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से हैं परेशान? वैशाख अमावस्या पर करें ये अचूक उपाय,बरसेगी शनिदेव की कृपा

News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यधिक महत्व है। कृष्ण पक्ष की आखिरी तिथि को अमावस्या कहा जाता है, जो पितरों के तर्पण और ग्रहों के दोष निवारण के लिए सर्वोत्तम मानी गई है। इस साल वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल 2026 को पड़ रही है। ज्योतिषविदों के अनुसार, यह दिन कुंडली में राहु-केतु और विशेष रूप से शनि दोष को दूर करने के लिए बेहद खास है। यदि आप भी शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के कष्टों से जूझ रहे हैं, तो इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय आपके जीवन में सुख-समृद्धि और शांति ला सकते हैं।वैशाख अमावस्या 2026: तिथि और शुभ मुहूर्तदृक पंचांग के अनुसार, वैशाख अमावस्या तिथि की गणना इस प्रकार है:अमावस्या तिथि शुरू: 16 अप्रैल 2026 को रात 08:11 बजे से।अमावस्या तिथि समाप्त: 17 अप्रैल 2026 को शाम 05:21 बजे तक।उदया तिथि: उदया तिथि के आधार पर वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल को ही मनाई जाएगी। इसी दिन स्नान, दान और व्रत-पूजन का विधान रहेगा।शनि के कष्टों से मुक्ति के लिए करें ये 4 आसान उपाय1. हनुमान जी की शरण में जाएं: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि देव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि वे उनके भक्तों को कभी प्रताड़ित नहीं करेंगे। वैशाख अमावस्या पर हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करने से शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव कम होता है।2. शनि मंत्रों का जाप: इस दिन शनि मंदिर में जाकर सरसों के तेल का दीप जलाएं और शनि देव के बीज मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का कम से कम 108 बार जाप करें। इसके अलावा ‘दशरथ कृत शनि स्तोत्र’ का पाठ करना भी शत्रुओं और आर्थिक बाधाओं से मुक्ति दिलाता है।3. पीपल के वृक्ष की पूजा: शास्त्रों के अनुसार, पीपल के वृक्ष में त्रिदेवों के साथ-साथ शनि देव का भी वास होता है। अमावस्या के दिन सुबह पीपल में जल अर्पित करें और शाम को पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर 7 बार परिक्रमा करें। यह उपाय शनि देव को अति प्रसन्न करने वाला माना गया है।4. विशेष वस्तुओं का दान: शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है, जो दान-पुण्य से प्रसन्न होते हैं। इस दिन काली उड़द, काला छाता, काले वस्त्र, सरसों का तेल और लोहे की वस्तुओं का दान गरीब या जरूरतमंद को करें। ऐसा करने से शारीरिक कष्टों और मानसिक तनाव में कमी आती है।पितृ दोष से भी मिलेगी मुक्तिवैशाख अमावस्या न केवल शनि देव बल्कि पितरों को प्रसन्न करने के लिए भी श्रेष्ठ है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान के बाद पितरों के निमित्त तर्पण करने से घर की अशांति दूर होती है और वंश वृद्धि में आ रही बाधाएं खत्म होती हैं। यदि आप किसी पवित्र नदी तक नहीं जा सकते, तो घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का ध्यान करें।