News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) भर्ती के हालिया नतीजों ने अभ्यर्थियों के बीच बेचैनी बढ़ा दी है। चौंकाने वाली बात यह है कि योग्य उम्मीदवारों की फौज होने के बावजूद आयोग ने 28 पदों को रिक्त (Vacant) छोड़ने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद आयोग की मूल्यांकन पद्धति और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। प्रतियोगी छात्र अब सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक इस ‘अधूरे’ परिणाम के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं।क्यों खाली रह गए 28 पद? आयोग का ‘स्पेशल’ तर्कआयोग की ओर से जारी सूचना के अनुसार, इन 28 पदों के लिए निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले उपयुक्त अभ्यर्थी नहीं मिल सके। इनमें से अधिकांश पद विशेष योग्यता (Special Qualification) वाले बताए जा रहे हैं। हालांकि, अभ्यर्थियों का तर्क है कि जब प्री और मेंस परीक्षा में हजारों छात्र शामिल हुए थे, तो ऐसा कैसे संभव है कि कुछ सीटों के लिए न्यूनतम अर्हता अंक पाने वाले छात्र भी नहीं मिले। छात्रों का आरोप है कि आयोग ने जानबूझकर मूल्यांकन प्रक्रिया को इतना जटिल बना दिया है कि रिक्तियां भरना मुश्किल हो गया है।मूल्यांकन प्रणाली पर उठी उंगली: स्केलिंग या साजिश?UPPSC की मूल्यांकन पद्धति हमेशा से चर्चा का विषय रही है। आरओ-एआरओ परीक्षा में शामिल कई मेधावी छात्रों ने दावा किया है कि उनके उत्तर सही होने और कट-ऑफ से अधिक अंक आने की उम्मीद होने के बावजूद उन्हें चयन सूची से बाहर रखा गया है। छात्रों का कहना है कि आयोग उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और अंकों के निर्धारण में जिस ‘गुप्त’ फॉर्मूले का इस्तेमाल करता है, वह पारदर्शी नहीं है। आरटीआई के जरिए अंक मांगने पर भी अक्सर निराशा ही हाथ लगती है, जिससे विवाद और गहरा गया है।सचिवालय सेवा पर पड़ेगा असर, बढ़ेगा कामकाज का बोझसमीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी के ये 28 पद उत्तर प्रदेश सचिवालय के महत्वपूर्ण अनुभागों से संबंधित थे। इन पदों के खाली रह जाने का सीधा असर सरकारी कामकाज की गति पर पड़ेगा। सचिवालय में पहले से ही अधिकारियों की कमी है, और अब इन रिक्तियों को अगली भर्ती (Backlog) के लिए टालने से मौजूदा स्टाफ पर काम का दबाव और बढ़ेगा। जानकारों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को समय पर और पूर्ण रूप से संपन्न न करना प्रशासन की कार्यकुशलता पर भी सवाल उठाता है।आक्रोशित छात्र और कानूनी लड़ाई की तैयारीआयोग के इस फैसले के खिलाफ प्रतियोगी छात्र अब लामबंद हो रहे हैं। प्रयागराज के आजाद पार्क और आयोग के गेट पर छात्रों ने मौन प्रदर्शन की चेतावनी दी है। कई छात्र संगठनों का कहना है कि वे इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। उनकी मांग है कि इन 28 पदों के लिए ‘वेटिंग लिस्ट’ जारी की जाए या फिर कम अंक वाले उन छात्रों को मौका दिया जाए जो कतार में हैं। छात्रों का कहना है कि बार-बार भर्तियों का लटकना और पदों का खाली रहना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
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