News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और ध्यान को ईश्वर से जुड़ने का माध्यम माना गया है। लेकिन कई बार आपने महसूस किया होगा कि जैसे ही आप दीपक जलाकर मंत्रों का जाप या आरती शुरू करते हैं, अचानक तेज उबासी आने लगती है या आंखों में नींद और पानी भरने लगता है। अक्सर लोग इसे थकान या नींद की कमी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन शकुन शास्त्र और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के दौरान उबासी आने के पीछे गहरे संकेत छिपे होते हैं। आइए जानते हैं कि यह स्थिति आपके बारे में क्या कहती है।1. नकारात्मक ऊर्जा और विचारों का संघर्षधार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, जब हमारा मन दो अलग-अलग दिशाओं में भटकता है, तब पूजा के दौरान उबासी आती है। यदि आपके मन में कोई डर, चिंता या नकारात्मक विचार घर कर गए हैं, तो ईश्वर की भक्ति करते समय वे बाहर निकलने की कोशिश करते हैं। पूजा के दौरान आने वाली उबासी इस बात का संकेत है कि आपके अंदर की ‘नेगेटिविटी’ और बाहरी ‘पॉजिटिविटी’ के बीच युद्ध चल रहा है।2. ईश्वर की उपस्थिति का संकेतएक अन्य मान्यता यह भी है कि जब आप पूरी एकाग्रता के साथ पूजा करते हैं और उस समय अचानक आपकी आंखों में आंसू आने लगें या उबासी आए, तो इसका मतलब है कि आपकी प्रार्थना भगवान तक पहुंच रही है। यह इस बात का प्रमाण है कि आपकी आत्मा का परमात्मा से जुड़ाव हो रहा है। आंखों से आंसू गिरना मन की शुद्धि और अटूट श्रद्धा का प्रतीक माना गया है।3. भारीपन और आसुरी शक्तियों का प्रभावशकुन शास्त्र के अनुसार, यदि पूजा शुरू करते ही आपको भारीपन महसूस होने लगे या तेज नींद आने लगे, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आपके आसपास या घर में कुछ नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हैं। ये शक्तियां आपको पूजा करने से रोकने का प्रयास करती हैं ताकि आप आध्यात्मिक लाभ न उठा सकें। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को भगवान के नाम का स्मरण तेज कर देना चाहिए।4. एकाग्रता में कमी का वैज्ञानिक कारणआध्यात्मिक पहलुओं के साथ-साथ इसका एक मनोवैज्ञानिक कारण भी है। यदि आप बिना मन के या केवल परंपरा निभाने के लिए पूजा में बैठते हैं, तो मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और उबासी आने लगती है। पूजा के दौरान उबासी आना यह भी दर्शाता है कि आपका मन वर्तमान में नहीं है, बल्कि भविष्य या अतीत की चिंताओं में उलझा हुआ है।बचाव के उपाय: कैसे बढ़ाएं पूजा में एकाग्रता?आसन और शुद्धि: पूजा में बैठने से पहले हाथ-पैर धोकर शुद्ध हों और हमेशा आसन पर बैठकर ही पाठ करें।प्राणायाम: पूजा शुरू करने से पहले 2-3 मिनट प्राणायाम करें। इससे फेफड़ों को ऑक्सीजन मिलेगी और सुस्ती दूर होगी।दीपक और सुगंध: पूजा स्थल पर शुद्ध घी का दीपक जलाएं और चंदन या गुग्गल जैसी सुगंधित अगरबत्ती का प्रयोग करें। इससे वातावरण की नकारात्मकता दूर होती है।मौन और श्रद्धा: पूजा के समय बाहरी दुनिया की बातें भूलकर केवल अपने इष्ट देव का ध्यान करें।
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