News India Live, Digital Desk: बिहार की सियासत में ‘सम्राट युग’ की शुरुआत के साथ ही शासन व्यवस्था में बड़े बदलाव दिखने लगे हैं। मुख्यमंत्री की कमान संभालते ही सम्राट चौधरी पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। राज्य में सत्ता परिवर्तन तो हुआ है, लेकिन मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दिए हैं कि जनता से सीधा जुड़ाव रखने वाला ‘नीतीश मॉडल’ जारी रहेगा। इसी कड़ी में, लंबे समय से बंद पड़ा ‘मुख्यमंत्री जनता दरबार’ एक बार फिर से गुलजार हो गया है, जहाँ खुद मुख्यमंत्री लोगों की फरियाद सुन रहे हैं।सुशासन का भरोसा: नीतीश की परंपरा को आगे बढ़ा रहे सम्राटबिहार के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पदभार ग्रहण करने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों और जनहित की योजनाओं में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए।जनता दरबार की वापसी: नीतीश कुमार के कार्यकाल की पहचान रहे ‘जनता दरबार’ को सम्राट चौधरी ने उसी गर्मजोशी के साथ शुरू किया है। 15 अप्रैल 2026 को शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने सचिवालय में फरियादियों से मुलाकात की।अधिकारियों को निर्देश: मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दो-टूक कहा है कि फाइलों के अंबार के बजाय समस्याओं के समाधान पर ध्यान दें। उन्होंने कहा, “सरकार बदल सकती है, लेकिन जनता की सेवा का संकल्प नहीं बदलना चाहिए।”सचिवालय में हलचल, एक्शन में दिखे मुख्यमंत्रीमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शुक्रवार को अचानक राज्य सचिवालय (State Secretariat) पहुंचे, जिससे वहां मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया। उन्होंने विभिन्न विभागों का निरीक्षण किया और कार्यों की प्रगति रिपोर्ट मांगी। मुख्यमंत्री का यह ‘सरप्राइज विजिट’ संदेश था कि राज्य में अब काम की गति और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।’नीतीश मॉडल’ और भाजपा का नया तेवरराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट चौधरी नीतीश कुमार के उन कार्यक्रमों को अपना रहे हैं जिनकी जमीन पर अच्छी पकड़ रही है। हालांकि, भाजपा के नेतृत्व वाली इस नई सरकार का तेवर पहले से अलग और अधिक हमलावर दिखने वाला है। मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था (Law and Order) को अपनी पहली प्राथमिकता बताया है और पुलिस मुख्यालय को अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं।शपथ ग्रहण के बाद पहली बड़ी परीक्षा15 अप्रैल को बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रशासनिक ढांचे में तालमेल बिठाने की है। विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव जैसे अनुभवी नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाकर सरकार ने संतुलन साधने की कोशिश की है, ताकि नीतीश कुमार के पुराने प्रशासनिक अनुभव का लाभ मिलता रहे।
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