
News India Live, Digital Desk:पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। खुफिया रिपोर्टों और सैटेलाइट डेटा के हवाले से दावा किया जा रहा है कि चीन के रहस्यमयी कार्गो विमानों ने ईरान की राजधानी तेहरान में गुपचुप तरीके से लैंडिंग की है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन विमानों ने ईरानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से ठीक पहले अपने ‘ट्रांसपोंडर’ (ट्रैकिंग डिवाइस) बंद कर दिए थे, ताकि उन्हें रडार पर पकड़ा न जा सके।48 घंटे के भीतर 4 चीनी विमानों की ‘सीक्रेट’ लैंडिंगमीडिया रिपोर्ट्स और एविएशन ट्रैकर्स के मुताबिक, पिछले 48 घंटों के भीतर चीन के कम से कम चार बड़े मालवाहक विमान तेहरान के इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अन्य सैन्य ठिकानों पर उतरे हैं। दावा किया जा रहा है कि इन विमानों ने बीच रास्ते में ही अपनी लोकेशन छिपानी शुरू कर दी थी। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह से ‘रेडियो साइलेंस’ या ट्रांसपोंडर बंद करना तभी किया जाता है जब विमान में कोई बेहद संवेदनशील या गुप्त कार्गो ले जाया जा रहा हो।क्या चीन भेज रहा है खतरनाक हथियार?इस रहस्यमयी गतिविधि ने उन आशंकाओं को और बल दे दिया है कि चीन चोरी-छिपे ईरान को घातक हथियारों की सप्लाई कर रहा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (US Intelligence) ने पहले भी संकेत दिए थे कि बीजिंग, ईरान को अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइलें (MANPADS) भेजने की तैयारी में है। हालांकि, चीन और ईरान दोनों ने ही आधिकारिक तौर पर इन खबरों को ‘भ्रामक’ बताया है, लेकिन जिस तरह से ये विमान आधी रात के अंधेरे में तेहरान पहुंचे हैं, उसने शक की सुई चीन की तरफ घुमा दी है।अमेरिका की बढ़ी टेंशन, ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनीचीनी विमानों की इस हरकत के बाद वाशिंगटन में हड़कंप मच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि चीन ने ईरान को सैन्य मदद दी, तो बीजिंग पर भारी टैरिफ और कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे। हाल ही में यह भी खबर आई थी कि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच पत्रों के जरिए संवाद हुआ है, जिसमें चीन ने हथियार न भेजने का आश्वासन दिया था। लेकिन ताज़ा घटनाक्रम ने अमेरिकी दावों और चीनी वादों के बीच के अंतर को उजागर कर दिया है।पश्चिम एशिया में बदल सकते हैं युद्ध के समीकरणअगर इन विमानों के जरिए ईरान को चीन के आधुनिक हथियार और तकनीकी मदद मिल रही है, तो इससे क्षेत्र में युद्ध के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के सहयोग से ईरान की सैन्य ताकत कई गुना बढ़ सकती है, जो न केवल इजरायल बल्कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी हितों के लिए भी बड़ा खतरा साबित होगा। फिलहाल, सैटेलाइट इमेजरी के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उन विमानों से क्या सामान उतारा गया है।
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