
News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट में मचे कोहराम के बीच पाकिस्तान के जनरल आसिम मुनीर एक साथ दो नावों की सवारी कर रहे हैं। जहाँ एक ओर वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत बनकर ईरान के साथ ‘सीजफायर’ (युद्धविराम) के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी खुफिया एजेंसियां (Intelligence Agencies) ट्रंप को मुनीर से सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं।1. मुनीर और ट्रंप का ‘कलेक्शन’हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने जनरल मुनीर की जमकर तारीफ की थी और उन्हें अपना ‘पसंदीदा फील्ड मार्शल’ बताया था।भरोसे का कारण: ट्रंप को लगता है कि मुनीर के ईरान के साथ पुराने संबंध अमेरिका के काम आ सकते हैं।शांति की जिद: ट्रंप चाहते हैं कि उनकी मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता हो जाए, और इसके लिए वे मुनीर को एक ‘पुल’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।2. क्यों बेबस नजर आ रहे हैं मुनीर?ईरान अपनी शर्तों पर अडिग है, जिससे मुनीर की मध्यस्थता पर सवाल उठ रहे हैं:ईरान की जिद: हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले और परमाणु कार्यक्रम पर ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं है।दोहरा संकट: मुनीर को डर है कि अगर वे ट्रंप की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, तो पाकिस्तान को मिलने वाली अमेरिकी मदद बंद हो सकती है। वहीं, अगर वे ईरान पर ज्यादा दबाव डालते हैं, तो उनके पड़ोसी देश के साथ संबंध खराब हो सकते हैं।3. अमेरिकी इंटेलिजेंस का ‘रेड फ्लैग’ (Red Flag)अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों (जैसे फॉक्स न्यूज) के अनुसार, अमेरिकी खुफिया विभाग ने ट्रंप को मुनीर के बारे में चेतावनी दी है:ईरान से पुराने रिश्ते: मुनीर के संबंध ईरान के मारे जा चुके कमांडर कासिम सोलेमानी और रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के आला अधिकारियों से रहे हैं।अफगानिस्तान वाला डर: अमेरिका को डर है कि पाकिस्तान एक बार फिर वही ‘डबल गेम’ खेल सकता है जो उसने अफगानिस्तान युद्ध के दौरान खेला था—यानी अमेरिका से फंड लेना और पर्दे के पीछे से उसके दुश्मनों की मदद करना।4. क्या होगा अगला कदम?पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता (Peace Talks) होने की संभावना है।मुनीर की परीक्षा: इस वार्ता की सफलता या विफलता तय करेगी कि ट्रंप का मुनीर पर भरोसा बना रहेगा या पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ जाएगा।
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