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Strategic Mission: हॉर्मुज में गोलियों के बीच रियाद पहुँचे अजित डोभाल ,ऊर्जा और सुरक्षा पर सऊदी के साथ महा-मंथन

News India Live, Digital Desk: जब पूरी दुनिया की नज़रें ईरान और अमेरिका के बीच संभावित युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों पर हुई फायरिंग पर टिकी हैं, ठीक उसी समय भारत के ‘संकटमोचक’ अजित डोभाल सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुँचे। डोभाल की यह यात्रा केवल द्विपक्षीय वार्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे भारत की तीन बड़ी रणनीतिक चिंताएं छिपी हैं।1. ऊर्जा सुरक्षा: तेल की सप्लाई पर संकटभारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। हॉर्मुज में तनाव के कारण सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है।सऊदी का आश्वासन: डोभाल ने सऊदी के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान से मुलाकात की। भारत चाहता है कि यदि हॉर्मुज का रास्ता बंद होता है, तो सऊदी अरब वैकल्पिक मार्गों (Red Sea/Land Routes) से भारत को कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करे।ग्लोबल ऑयल मार्केट: डोभाल का यह दौरा कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों को स्थिर रखने के साझा प्रयासों का हिस्सा है।2. ‘ऑपरेशन संकल्प’ और समुद्री सुरक्षाहॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों (Sanmar Herald और Jag Arnav) पर ईरानी नौसेना की फायरिंग के बाद भारत की चिंता बढ़ गई है।खुफिया जानकारी साझा करना: डोभाल ने सऊदी के एनएसए मूसाएद अल-ऐबान के साथ समुद्री सुरक्षा और खुफिया जानकारी साझा करने (Intelligence Sharing) पर चर्चा की।सुरक्षित गलियारा: भारत चाहता है कि सऊदी अरब इस क्षेत्र में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर समुद्री लुटेरों और अन्य सैन्य खतरों से भारतीय व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रखने में मदद करे।3. ईरान-अमेरिका तनाव में ‘मध्यस्थ’ की भूमिका?सूत्रों के अनुसार, भारत इस क्षेत्र में शांति बहाली के लिए पर्दे के पीछे से काम कर रहा है।डी-एस्केलेशन (De-escalation): भारत नहीं चाहता कि ईरान और अमेरिका का टकराव एक पूर्ण युद्ध में बदले। सऊदी अरब के साथ मिलकर भारत इस तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।पकिस्तान में वार्ता: रिपोर्टों के अनुसार, इसी सप्ताह पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की गुप्त वार्ता हो सकती है। डोभाल की रियाद यात्रा को इस वार्ता से पहले ‘सहयोगी देशों’ को विश्वास में लेने की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।4. 90 लाख भारतीयों की सुरक्षाखाड़ी देशों में लगभग 90 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं। यदि युद्ध छिड़ता है, तो उनका सुरक्षित निष्कासन (Evacuation) भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। डोभाल ने सऊदी नेतृत्व से वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और किसी भी आपात स्थिति में सहयोग का आश्वासन माँगा है।