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बिहार में स्थानीय ठेकेदारों की मौज 50 करोड़ तक के टेंडरों में मिलेगी प्राथमिकता, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान

News India Live, Digital Desk: बिहार सरकार ने स्थानीय विकास और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। उपमुख्यमंत्री और सड़क निर्माण मंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) ने घोषणा की है कि राज्य में सड़क निर्माण के 50 करोड़ रुपये तक के टेंडरों में अब बिहार के स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता (Preference) दी जाएगी। इस फैसले का उद्देश्य बिहार की प्रतिभा और संसाधनों का लाभ राज्य के भीतर ही सुनिश्चित करना है।फैसले की मुख्य बातें (Key Highlights)बिहार के सड़क निर्माण विभाग (RCD) ने अपनी नीति में बड़े बदलाव किए हैं:50 करोड़ की सीमा: अब 50 करोड़ रुपये तक की लागत वाली सड़क परियोजनाओं के टेंडर में बाहरी बड़ी कंपनियों के बजाय स्थानीय रजिस्टर्ड ठेकेदारों को प्राथमिकता मिलेगी।स्थानीय युवाओं को मौका: सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि इस कदम से राज्य के छोटे और मंझोले ठेकेदारों को बड़े प्रोजेक्ट्स का अनुभव मिलेगा, जिससे भविष्य में वे और भी बड़े कार्यों के लिए सक्षम बन सकेंगे।अनुभव की शर्तों में ढील: टेंडर प्रक्रिया में स्थानीय ठेकेदारों के लिए तकनीकी अनुभव (Technical Experience) की कुछ कड़ी शर्तों को भी सरल बनाने पर विचार किया जा रहा है ताकि वे प्रतिस्पर्धा में टिक सकें।क्यों लिया गया यह फैसला? (The Strategic Goal)पूंजी का राज्य में ठहराव: जब स्थानीय ठेकेदार काम करेंगे, तो प्रोजेक्ट का पैसा बिहार के बाजारों में ही रहेगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।रोजगार सृजन: स्थानीय ठेकेदार आमतौर पर स्थानीय मजदूरों और स्किल्ड लेबर को काम पर रखते हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा।विकास में तेजी: स्थानीय ठेकेदारों को भौगोलिक परिस्थितियों का बेहतर अंदाजा होता है, जिससे छोटे और जिला स्तर के सड़क प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होने की उम्मीद है।टेंडर प्रक्रिया में बदलाव (Changes in Tender Process)सरकार ने टेंडर के नियमों में जो बदलाव प्रस्तावित किए हैं, उनके अनुसार:टेंडर आमंत्रण के दौरान ‘बिहार के मूल निवासी’ या ‘राज्य में रजिस्टर्ड फर्मों’ को वेटेज (Weightage) दिया जाएगा।पंजीकरण प्रक्रिया (Registration Process) को ऑनलाइन और अधिक पारदर्शी बनाया गया है ताकि भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो सके।बिहार की सड़कों का कायाकल्पसम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि बिहार अब ‘एक्सप्रेसवे और हाईवेज’ के युग में प्रवेश कर चुका है। 50 करोड़ तक के प्रोजेक्ट्स में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होने से न केवल गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि ठेकेदारों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी पैदा होगी।