
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं, क्योंकि वैश्विक मंच पर एक बार फिर दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं का जमावड़ा लगने वाला है। जी7 (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच कोई विशेष द्विपक्षीय मुलाकात होगी। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के मौजूदा दौर को देखते हुए इस संभावित बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। राजनयिक गलियारों में इस बात की सुगबुगाहट तेज है कि यह मुलाकात न केवल दोनों देशों के आपसी रिश्तों को नई दिशा देगी, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के समीकरणों को भी पूरी तरह से प्रभावित करने का माद्दा रखती है।
कच्चे तेल की कीमतों पर मचेगा घमासान, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर होगी सीधी बात इस संभावित महामुलाकात के एजेंडे में सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति और उसकी वैश्विक कीमतें होने जा रहा है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और प्रतिबंधों के बीच भारत लगातार अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर काम कर रहा है। ऐसे में अमेरिकी प्रशासन के रुख और वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता को लेकर दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत बेहद निर्णायक साबित हो सकती है। ट्रंप की नीतियां हमेशा से ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और अमेरिकी हितों को सर्वोपरि रखने की रही हैं, जिसके चलते भारत के लिए अपने आर्थिक हितों को साधते हुए कच्चे तेल के आयात पर अमेरिकी सहयोग हासिल करना एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा होगी।
भारत-अमेरिका मेगा ट्रेड डील पर टिकी हैं उद्योग जगत की निगाहें, हो सकता है बड़ा खेला कच्चे तेल के अलावा जिस दूसरे बड़े मुद्दे पर पूरी दुनिया के व्यापारिक घरानों की नजर है, वह है भारत और अमेरिका के बीच रुकी हुई या नई रूपरेखा के साथ आने वाली मेगा ट्रेड डील। डोनाल्ड ट्रंप के व्यापारिक रुख को देखते हुए यह माना जा रहा है कि टैरिफ, इंपोर्ट ड्यूटी और बाजार पहुंच (Market Access) जैसे मुद्दों पर तीखी और गंभीर चर्चा हो सकती है। भारत जहां अमेरिकी बाजार में अपने आईटी प्रोफेशनल्स और चुनिंदा सेक्टर्स के लिए रियायतें चाहेगा, वहीं अमेरिका अपने कृषि उत्पादों और मैन्युफैक्चरिंग गुड्स के लिए भारतीय बाजार को और अधिक खुलवाना चाहेगा। इस आर्थिक खींचतान के बीच अगर दोनों देश किसी आम सहमति पर पहुंचते हैं, तो यह वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है।
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