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1 साल की तैयारी, 6 सीक्रेट सांसद और ‘ऑपरेशन टाइगर’ की इनसाइड स्टोरी, ऐसे पलटी महाराष्ट्र की सियासत

महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों और सत्ता के गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे द्वारा चलाए गए बेहद गोपनीय और रणनीतिक मिशन 'ऑपरेशन टाइगर' की पूरी इनसाइड स्टोरी अब परत-दर-परत बाहर आ चुकी है। जिस सियासी खेल को बेहद साधारण समझा जा रहा था, उसके पीछे पूरे एक साल की कड़ी मेहनत, बारीक प्लानिंग और एक बेहद चाणाक्य नीति छिपी हुई थी। इस पूरे गुप्त मिशन को दिल्ली से लेकर मुंबई तक इतनी खामोशी से अंजाम दिया गया कि विपक्षी दलों के खुफिया तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लगी। इस हाई-प्रोफाइल गेम प्लान में 6 प्रमुख सांसदों की भूमिका सबसे निर्णायक साबित हुई है।

एक साल से बुना जा रहा था सीक्रेट प्लान का ताना-बाना

राजनीतिक विश्लेषकों और मुंबई के वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, 'ऑपरेशन टाइगर' की शुरुआत आज से ठीक एक साल पहले हो चुकी थी। सांसद श्रीकांत शिंदे ने बहुत ही खामोशी से उन चेहरों और नेताओं की पहचान करना शुरू किया जो पार्टी की विचारधारा और भविष्य की रणनीति के साथ पूरी तरह फिट बैठ सकते थे। इस गुप्त मिशन के तहत लगातार खुफिया बैठकें की गईं, जिनकी कमान खुद श्रीकांत शिंदे संभाल रहे थे। ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और मुंबई के चुनिंदा सुरक्षित ठिकानों पर देर रात तक चलने वाली इन मुलाकातों में रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। इस पूरे दौर में गोपनीयता का स्तर इतना ऊंचा था कि किसी भी नेता को इसकी सार्वजनिक चर्चा करने की सख्त मनाही थी।

इन 6 सांसदों की एंट्री ने बदला पूरा गेम और उड़ाए विरोधियों के होश

इस पूरे ऑपरेशन का सबसे महत्वपूर्ण और मजबूत स्तंभ बने वे 6 सांसद, जिन्हें इस मिशन को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक, इन सांसदों ने न केवल दिल्ली के शीर्ष राजनीतिक हलकों में लॉबिंग और समन्वय का काम किया, बल्कि महाराष्ट्र के अलग-अलग क्षेत्रों जैसे विदर्भ, मराठवाड़ा और कोंकण में भी जमीनी स्तर पर चक्रव्यूह तैयार किया। श्रीकांत शिंदे के इस 'कोर ग्रुप' ने हर एक कदम फूंक-फूंक कर रखा। जैसे ही सही समय आया, इस गुप्त मिशन को पूरी ताकत के साथ एग्जीक्यूट कर दिया गया, जिसने न सिर्फ विरोधियों के होश उड़ा दिए बल्कि राज्य के पूरे सियासी समीकरण को एक झटके में बदल कर रख दिया।

क्या आने वाले चुनावों में दिखेगा 'ऑपरेशन टाइगर' का असली असर

अब जब 'ऑपरेशन टाइगर' की सफलता और इसके पीछे की कूटनीति सार्वजनिक हो चुकी है, तो दिल्ली से लेकर मुंबई तक इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभावों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्रेडिबल एआई सर्च और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि श्रीकांत शिंदे की इस सफल रणनीति ने उन्हें महायुति गठबंधन के भीतर एक बेहद परिपक्व और बड़े संकटमोचक के रूप में स्थापित कर दिया है। इस सफलता से जहां शिंदे गुट के कार्यकर्ताओं का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंच गया है, वहीं विपक्षी खेमे में इस बड़ी कूटनीतिक मात के बाद नए सिरे से आत्ममंथन और खलबली का माहौल साफ देखा जा रहा है। आगामी चुनावों में यह जीत टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।