
महाराष्ट्र की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। हाई-वोल्टेज ड्रामे और कशमकश के बीच संपन्न हुए महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC Election Result) के चुनावी नतीजे घोषित हो गए हैं। इन नतीजों ने राज्य के सियासी समीकरणों को पूरी तरह से हिला कर रख दिया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को इस चुनाव में एक बड़ा और अप्रत्याशित झटका लगा है, जबकि उनकी सहयोगी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना दबदबा कायम रखते हुए बंपर जीत दर्ज की है। मुंबई, नागपुर और पुणे समेत पूरे सूबे में इन नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल चरम पर पहुंच गई है, क्योंकि इसका सीधा असर आने वाले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।
क्रॉस वोटिंग के दावों के बीच बीजेपी ने मारी बाजी, शिंदे गुट बैकफुट पर
मुंबई स्थित विधान भवन से आ रहे आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी ने रणनीतिक रूप से अपने सभी उम्मीदवारों को जिताने में कामयाबी हासिल की है। बीजेपी के इस शानदार प्रदर्शन से देवेंद्र फडणवीस का संकटमोचक वाला रूप एक बार फिर उभरकर सामने आया है। दूसरी ओर, सत्ताधारी महायुति गठबंधन के प्रमुख हिस्सेदार और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए यह नतीजे बेहद परेशान करने वाले रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) होने की आशंका जताई जा रही है, जिसके चलते शिंदे गुट के रणनीतिकारों के गणित पूरी तरह फेल साबित हुए और पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
महाविकास अघाड़ी में असमंजस, जानिए कांग्रेस और उद्धव शिवसेना का हाल
विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (MVA) के लिए भी ये नतीजे मिले-जुले और कई मायनों में आंखें खोलने वाले रहे हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने अपनी साख बचाने के लिए पूरा जोर लगाया था। कांग्रेस पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह और गुटबाजी का असर एक बार फिर से इस गुप्त मतदान वाले चुनाव में देखने को मिला है। कांग्रेस के कुछ विधायकों द्वारा पार्टी लाइन से हटकर वोट करने की खबरों ने दिल्ली से लेकर मुंबई तक कांग्रेस आलाकमान की चिंता बढ़ा दी है। इस हार-जीत के बाद अब महाविकास अघाड़ी के भीतर भी आने वाले दिनों में आत्ममंथन और बैठकों का दौर शुरू होने वाला है।
विधानसभा चुनाव से पहले बदले समीकरण, अब आगे क्या होगी रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधान परिषद के इन नतीजों का असर महाराष्ट्र की रोजमर्रा की राजनीति पर गहरा पड़ेगा। बीजेपी जहां इस जीत के बाद सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर और अधिक आक्रामक रुख अपना सकती है, वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अपने विधायकों और मंत्रियों को एकजुट रखने के लिए नए सिरे से डैमेज कंट्रोल करना होगा। मुंबई और नागपुर के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा आम है कि इस चुनाव ने साफ कर दिया है कि जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत किए बिना किसी भी चुनाव को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अब सभी दलों की नजरें आगामी मानसून सत्र और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के रोडमैप पर टिक गई हैं।
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