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ब्रिटिश पीएम कीर स्टॉर्मर का भावुक इस्तीफा, क्या अब अधर में लटक जाएगा भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता

ब्रिटेन (UK) की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर ने अपने पद से इस्तीफा देने का एलान कर दिया है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर देश को संबोधित करते हुए स्टॉर्मर बेहद भावुक नजर आए और उन्होंने अपने इस फैसले से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। ब्रिटेन में चल रहे आंतरिक राजनीतिक घटनाक्रमों और बढ़ते दबाव के बीच आया यह इस्तीफा न सिर्फ ब्रिटिश राजनीति के लिए एक बड़ा मोड़ है, बल्कि इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी पड़ने वाला है। इस वक्त नई दिल्ली से लेकर लंदन तक सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पिछले काफी समय से अधर में लटका भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (India-UK FTA) अब किस दिशा में जाएगा।

कीर स्टॉर्मर के अचानक विदा होने के पीछे की बड़ी वजहें

एक सीनियर रिपोर्टर के तौर पर अगर हम लंदन के राजनीतिक गलियारों में चल रही हलचलों को देखें, तो कीर स्टॉर्मर का यह फैसला अप्रत्याशित नहीं था, लेकिन इसकी टाइमिंग ने सबको चौंकाया है। पिछले कुछ महीनों से देश की सुस्त अर्थव्यवस्था, लेबर पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेद और आव्रजन (Immigration) के मुद्दों पर स्टॉर्मर सरकार लगातार चौतरफा घिरी हुई थी। अपनी ही पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के असंतोष और देश में घटती लोकप्रियता के बाद स्टॉर्मर ने बेहद भावुक अंदाज में सत्ता की कमान छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि देश के हित और पार्टी की एकजुटता के लिए उनका पीछे हटना जरूरी हो गया था। इस इस्तीफे के बाद अब ब्रिटेन में नए नेतृत्व को चुनने की कवायद तेज हो गई है।

भारत-ब्रिटेन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर मंडराने लगे अनिश्चितता के बादल

इस बड़े राजनीतिक उलटफेर का सबसे गहरा असर भारत और ब्रिटेन के बीच होने वाले महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर पड़ने की आशंका है। दोनों देश पिछले कई दौर की वार्ताओं के बाद इस डील को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके थे। कीर स्टॉर्मर और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई हालिया मुलाकातों में इस समझौते को जल्द से जल्द लागू करने पर सहमति बनी थी। लेकिन अब ब्रिटेन के शीर्ष नेतृत्व में आए इस खालीपन के कारण इस समझौते की रफ्तार एक बार फिर धीमी हो सकती है। जब तक ब्रिटेन में नई सरकार का गठन नहीं हो जाता और नया प्रधानमंत्री कार्यभार नहीं संभाल लेता, तब तक नीतिगत फैसलों पर रोक लग सकती है।

क्या नई ब्रिटिश सरकार बदलेगी भारत के प्रति अपना रुख

ग्लोबल डिप्लोमेसी और आर्थिक जानकारों का मानना है कि ब्रिटेन चाहे जो भी नया प्रधानमंत्री चुने, भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को नजरअंदाज करना उसके लिए मुमकिन नहीं होगा। ब्रिटेन इस वक्त खुद आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है और उसे भारतीय बाजार की सख्त जरूरत है। हालांकि, लेबर पार्टी के भीतर या विपक्ष के नए गुटों की प्राथमिकताओं में थोड़ा बदलाव आ सकता है, जिससे वीजा नियमों, आईटी प्रोफेशल्स की आवाजाही और स्कॉच व्हिस्की जैसी चीजों पर कस्टम ड्यूटी को लेकर चल रही बातचीत में नए सिरे से मोलभाव करना पड़ सकता है। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय भी इस पूरे राजनीतिक संकट पर नजर बनाए हुए है और नई सरकार के गठन के बाद दोबारा बातचीत को पटरी पर लाने की उम्मीद कर रहा है।