Wednesday , June 24 2026

लखनऊ अलीगंज अग्निकांड: 15 मौतों के बाद जागा LDA, अवैध ‘डेथ ट्रैप’ को ढहाने का दोबारा नोटिस; 4 आरोपी अरेस्ट और भ्रष्ट अफसरों पर गिरेगा गाज

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए रूह कंपा देने वाले अग्निकांड के बाद शासन से लेकर प्रशासनिक महकमे तक में हड़कंप मचा हुआ है। 15 मासूम छात्र-छात्राओं की दर्दनाक मौत के बाद गहरी नींद से जागे लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने मंगलवार को उस अवैध तीन मंजिला इमारत को एक बार फिर से जमींदोज करने का अंतिम नोटिस जारी कर दिया है। इसके साथ ही, एक पूरी तरह से रिहायशी (Residential) बिल्डिंग को सालों-साल तक नियमों को ताक पर रखकर गैर-कानूनी तरीके से कमर्शियल स्पेस के रूप में चलने देने के मामले में एलडीए ने अपने ही विभाग के अधिकारियों और इंजीनियरों पर हंटर चलाना शुरू कर दिया है।

लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का ऐलान करते हुए बताया कि सोमवार को जिस इमारत में यह भीषण हादसा हुआ, उसे निर्माण संबंधी नियमों के गंभीर उल्लंघन को लेकर फिर से गिराने का नोटिस दिया गया है। उपाध्यक्ष ने साफ किया कि इस जानलेवा लापरवाही में शामिल रहे तत्कालीन और वर्तमान अधिकारियों को चिह्नित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, ताकि इतने वर्षों से चल रहे भ्रष्टाचार और मिलीभगत का पूरा सच सामने आ सके और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।

साल 2016 में भी जारी हुआ था ढहाने का आदेश, लेकिन हुआ खेल

इस पूरी इमारत का इतिहास सीधे तौर पर सिस्टम के भ्रष्टाचार और प्रशासनिक घोर लापरवाही की गवाही देता है। एलडीए अधिकारियों के मुताबिक, इस तीन मंजिला अवैध इमारत को साल 2016 में ही पूरी तरह गिराने का अंतिम आदेश पारित किया गया था। लेकिन भ्रष्ट सिस्टम की सांठगांठ का खेल देखिए कि महज दो महीने से भी कम समय के भीतर उस कड़े आदेश को चुपके से वापस (Revoke) ले लिया गया। विभागीय अफसरों और मालिकों की इसी मिलीभगत का नतीजा रहा कि यह ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का जाल) सालों तक बिना किसी डर के वीआईपी रिहायशी इलाके में चलता रहा और अंत में 15 हंसते-खेलते परिवारों के चिराग बुझ गए।

4 आरोपी सलाखों के पीछे, 4 अधिकारी सस्पेंड और SIT का गठन

इस भयावह घटना पर मुख्यमंत्री के बेहद सख्त रुख के बाद पुलिस और प्रशासन ने ताबड़तोड़ एक्शन लिया है। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इस हादसे के चार मुख्य जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान रामकृष्ण उपाध्याय (43), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62), तुषार कृष्ण जायसवाल (31) और सुरेश कुमार साहू के रूप में हुई है। इसके साथ ही, प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर बिजली विभाग, फायर ब्रिगेड और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के चार अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है।

अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित ऊषा मेहता मार्ग पर हुई इस दर्दनाक घटना की गहराई से जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक हाई-लेवल विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस दो सदस्यीय एसआईटी में अपर मुख्य सचिव (पर्यटन) अमृत अभिजात और अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) लखनऊ जोन, प्रवीण तिवारी शामिल हैं, जो पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जल्द ही सीधे शासन को सौंपेंगे।

जानिए कैसे हुआ यह दिल दहला देने वाला अलीगंज अग्निकांड?

यह हृदय विदारक घटना सोमवार दोपहर लखनऊ के सबसे व्यस्त रिहायशी इलाकों में से एक अलीगंज के सेक्टर-डी (ऊषा मेहता मार्ग, पुरनिया) में घटित हुई। नियमों को कुचलकर खड़ी की गई इस तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में ‘हेड हॉपर 3D आर्ट स्टूडियो’ नाम का एक नामी एनीमेशन सेंटर और कोचिंग हब चल रहा था। इस बिल्डिंग की पहली मंजिल पर एक पेट शॉप (Pet Shop) थी, दूसरी मंजिल पर ग्राफिक एनीमेशन का सेंटर था और सबसे टॉप फ्लोर यानी तीसरी मंजिल पर एक प्राइवेट लाइब्रेरी चलाई जा रही थी, जहां दर्जनों छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे।

बिजली कटते ही जाम हुआ बायोमेट्रिक थंब-लॉक गेट, बना मासूमों का काल

सोमवार दोपहर को अचानक बिल्डिंग के दूसरे फ्लोर पर स्थित एनीमेशन सेंटर में शॉर्ट सर्किट हुआ और भीषण आग लग गई। देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग में जहरीला और गाढ़ा काला धुआं फैल गया। इस आधुनिक ऑफिस का मुख्य दरवाजा ‘थंब एम्प्रेशन’ (बायोमेट्रिक अंगूठा प्रणाली) से लॉक और अनलॉक होता था। आग लगते ही जैसे ही पूरी बिल्डिंग की बिजली कटी, वह बायोमेट्रिक सिस्टम पूरी तरह से हैंग हो गया और दरवाजा ऑटोमैटिक लॉक हो गया। इसके चलते अंदर मौजूद छात्रों को बाहर भागने का कोई रास्ता ही नहीं मिला।

पूरी बिल्डिंग को बाहर से बड़े-बड़े शीशों से पैक किया गया था, जिसमें कोई भी आपातकालीन निकास द्वार (Emergency Exit) नहीं था और न ही कोई चालू फायर फाइटिंग सिस्टम मौजूद था। नीचे उतरने का इकलौता संकरा रास्ता पूरी तरह आग की लपटों और धुएं की चपेट में आ चुका था। अपनी जान बचाने के लिए बच्चे कमरों और बाथरूम में छिप गए, जहां ऑक्सीजन खत्म होने और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस के कारण अधिकांश बच्चों का दम घुट गया।

दीवार तोड़कर किया गया रेस्क्यू, 15 की मौत और 9 जिंदगी के लिए जूझ रहे

मौके पर पहुंची दमकल और रेस्क्यू टीम को अंदर फंसे बच्चों तक पहुंचने के लिए कंक्रीट की मजबूत दीवार को तोड़ना पड़ा। इस अग्निकांड में 15 मासूमों की जिंदा जलने और दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर वो छात्र थे जो अपने सुनहरे भविष्य का सपना लेकर यहां कोचिंग करने आए थे। इसके अलावा 9 अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिनका अस्पताल के केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है। इस भयावह घटना ने एक बार फिर शहरों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध कमर्शियल बेसमेंट्स, कोचिंग सेंटर्स की सुरक्षा और भ्रष्ट नौकरशाही पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।