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अयोध्या राम मंदिर दान विवाद: SIT ने यूपी सरकार को सौंपी 150 पन्नों की गोपनीय रिपोर्ट, FIR और ट्रस्ट के पुनर्गठन की सिफारिश से मचा हड़कंप

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित हेराफेरी के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में भूचाल आया हुआ है। विपक्ष लगातार इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा था। विवाद बढ़ता देख उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गहराई से जांच करने का जिम्मा स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को सौंपा था। इस मामले में आज (23 जून, 2026) एक बहुत बड़ा अपडेट आया है। SIT ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है, जिसके बाद से ही प्रशासनिक गलियारों और मंदिर प्रबंधन में हड़कंप मच गया है।

3 सदस्यीय टीम ने गृह विभाग को सौंपी रिपोर्ट, हो सकते हैं चौंकाने वाले खुलासे

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 3 सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने अपनी यह शुरुआती रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) संजय प्रसाद को सौंप दी है। इस विस्तृत रिपोर्ट में पिछले कई दिनों से चल रही जांच-पड़ताल और दस्तावेजी सबूतों का पूरा ब्यौरा शामिल है। लखनऊ मंडल के आयुक्त और एसआईटी के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत ने टीम के बाकी दो सदस्यों के साथ मिलकर यह रिपोर्ट शासन को सौंपी। पंत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि रिपोर्ट सौंप दी गई है, लेकिन यह एक शुरुआती और बेहद गोपनीय रिपोर्ट है, इसलिए इसके नतीजों के बारे में फिलहाल सार्वजनिक रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही कई रसूखदार लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।

आंतरिक व्यवस्था और दान की निगरानी पर खड़े हुए गंभीर सवाल

विभागीय सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में राम मंदिर में आने वाली दान राशि की गिनती और उसकी निगरानी करने वाली व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों का चयन किस आधार पर किया गया था और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों से उनके क्या संबंध थे। सूत्रों की मानें तो जांच टीम ने कुछ दोषी कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर कानूनी मुकदमा चलाने की संस्तुति (सिफारिश) की है। इसके साथ ही मंदिर की आंतरिक व्यवस्था संभालने वाले कुछ बड़े पदाधिकारियों की भूमिका को भी संदेहास्पद माना गया है।

150 पेज की रिपोर्ट में 150 लोगों से पूछताछ का पूरा कच्चा चिट्ठा

सूत्रों के अनुसार, यह प्रारंभिक रिपोर्ट करीब 150 पन्नों की है, जिसमें मंदिर से जुड़े लगभग 150 व्यक्तियों और सेवादारों से की गई कड़ी पूछताछ का पूरा विवरण दर्ज है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एसआईटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन (दोबारा बनाने) की मजबूत सिफारिश की है। टीम का सुझाव है कि मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए सरकार को किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (IAS लेवल) को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में नियुक्त करना चाहिए। इसके अलावा, एसआईटी ने पिछले 5 वर्षों में मंदिर को मिले देश-विदेश के सभी दानों का फोरेंसिक ऑडिट कराने की बात भी कही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लेंगे अंतिम फैसला, जांच अभी रहेगी जारी

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट नहीं है, बल्कि जांच की कार्रवाई अभी भी प्रचलित (जारी) है। एसआईटी ने इस पूरे घोटाले की तह तक जाने के लिए शासन से कुछ और समय और सहयोगी अधिकारियों की मांग की है। रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए कर्मचारियों की नए सिरे से पारदर्शी भर्ती करने और प्रशासनिक पहरेदारी को मजबूत करने के कई कड़े उपाय सुझाए गए हैं। अब इस बेहद संवेदनशील मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई होगी, ट्रस्ट में क्या बदलाव किए जाएंगे और किन लोगों पर गाज गिरेगी— इस पर अंतिम फैसला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लेंगे।