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एक देश, एक कानून: सुवेंदु सरकार ला रही है ऐतिहासिक UCC बिल, जानिए लिव-इन और संपत्ति के नियमों पर क्या पड़ेगा असर!

पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज (29 जून 2026) का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है. सूबे की नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार विधानसभा के विशेष सत्र में देश के सबसे चर्चित और वैचारिक रूप से संवेदनशील 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code-UCC) से जुड़ा बहुप्रतीक्षित विधेयक पेश करने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस बड़े फैसले ने राज्य की राजनीति से लेकर आम जनता के बीच एक नई बहस छेड़ दी है.

भारतीय जनता पार्टी ने 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान अपने 'संकल्प पत्र' में वादा किया था कि सरकार बनने के छह महीने के भीतर बंगाल में यूसीसी लागू किया जाएगा. उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद अब पश्चिम बंगाल देश का अगला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून होगा. आइए एक्सपर्ट रिपोर्टर की नजर से ग्राउंड रियलिटी को समझते हैं कि इस ऐतिहासिक कानून के लागू होने के बाद बंगाल के सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने पर क्या सीधा असर पड़ेगा.

शादी के नियमों में एकरूपता: मजहब चाहे जो हो, कानून होगा एक

समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद सबसे पहला और बड़ा प्रभाव विवाह (Marriage) से जुड़े व्यक्तिगत नियमों पर पड़ेगा. वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग धर्मों के लोग अपने-अपने पर्सनल लॉ (जैसे हिंदू मैरिज एक्ट या मुस्लिम पर्सनल लॉ) के तहत शादी करते हैं. लेकिन यूसीसी आने के बाद शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र (लड़कों के लिए 21 वर्ष और लड़कियों के लिए 18 वर्ष), एक से अधिक विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध (पॉलीगैमी का अंत) और शादी का अनिवार्य सरकारी पंजीकरण (Mandatory Registration) सभी समुदायों के लिए समान रूप से लागू हो जाएगा. इससे शादी से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी.

तलाक और गुजारे भत्ते (मैंटनेंस) के नियम होंगे बेहद कड़े

अभी तक देश में अलग-अलग मजहबों में तलाक (Divorce) लेने के तौर-तरीके और उसके बाद महिलाओं को मिलने वाले गुजारे भत्ते (Alimony) की व्यवस्था अलग-अलग है. यूसीसी के कानून के दायरे में आते ही तलाक लेने की कानूनी प्रक्रिया सभी धर्मों के पति-पत्नी के लिए एक जैसी हो जाएगी. सबसे महत्वपूर्ण बदलाव महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को लेकर होगा. तलाक की स्थिति में पत्नी और बच्चों को मिलने वाले भरण-पोषण और गुजारे भत्ते के नियम बेहद सख्त और एक समान बनाए जाएंगे, जिससे किसी भी वर्ग की महिला का उत्पीड़न न किया जा सके.

बेटा-बेटी को संपत्ति में बराबर का हक, वसीयत के नियम भी बदलेंगे

यदि विधानसभा में यह विधेयक पास होता है, तो उत्तराधिकार (Inheritance) और पैतृक संपत्ति के बंटवारे से जुड़े पुराने नियमों में क्रांतिकारी फेरबदल देखने को मिलेगा:

  • समान अधिकार: पिता की संपत्ति पर बेटे और बेटी का बिल्कुल एक समान कानूनी अधिकार होगा, चाहे बेटी शादीशुदा हो या अविवाहित.

  • एक जैसा ढांचा: वसीयत बनाने, गोद लेने (Adoption) और संपत्ति के हस्तांतरण के लिए एक ही कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा.

  • आदिवासियों को छूट की संभावना: सरकारी सूत्रों और उत्तराखंड के मॉडल के अनुसार, बंगाल की सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए आदिवासी (Tribal) समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जा सकता है.

लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: लापरवाही पर हो सकती है जेल!

पश्चिम बंगाल के प्रस्तावित यूसीसी ड्राफ्ट में सबसे आधुनिक और चर्चा का विषय 'लिव-इन रिलेशनशिप' (Live-in Relationship) को लेकर बनाया गया कानून है. नए नियमों के अनुसार, यदि कोई भी बालिग जोड़ा (कपल) बिना शादी किए एक साथ लिव-इन में रहने का फैसला करता है, तो उन्हें स्थानीय निर्धारित अथॉरिटी के पास जाकर इसका अनिवार्य रूप से पंजीकरण (Registration) कराना होगा.

इतना ही नहीं, यदि भविष्य में वे आपसी सहमति या किसी विवाद के कारण इस रिश्ते को खत्म करते हैं, तो उस 'ब्रेकअप' या रिश्ते के समापन का भी आधिकारिक पंजीकरण कराना जरूरी होगा. सरकार का तर्क है कि इस नियम से लिव-इन में रहने वाली महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिलेगी, उनके अधिकारों की रक्षा होगी और किसी भी प्रकार के आपराधिक या धोखेबाजी के मामलों पर लगाम कसी जा सकेगी.

बंगाल में क्यों ममाचा राजनीतिक घमासान?

सुवेंदु अधिकारी सरकार जहां इसे महिलाओं के सशक्तिकरण और 'एक देश, एक विधान' के संकल्प की ओर ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष (TMC) ने इस पर तीखा हमला बोला है. तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का आरोप है कि सरकार इस कानून के जरिए धार्मिक और सांस्कृतिक विविधताओं पर प्रहार कर रही है. हालांकि, सरकार विधानसभा के पटल पर इसे कानूनी प्रक्रिया (जज की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों) के तहत ही लागू करने की बात कह रही है. इसके साथ ही सरकार लोक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 'एंटी-सोशल एक्टिविटी बिल' भी पेश कर रही है, जिससे बंगाल की राजनीति आने वाले दिनों में और गरमाने वाली है.