
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर अक्सर कई तरह की अनदेखी देखने को मिलती है, खासकर जब बात उनकी शारीरिक कमजोरी या सांस फूलने की समस्या की आती है। जब भी कोई महिला सीढ़ियां चढ़ते समय, थोड़ा सा काम करते हुए या सामान्य सैर के दौरान सांस फूलने (Shortness of Breath) की शिकायत करती है, तो परिवार और समाज के लोग इसे बहुत ही आम बात मानकर टाल देते हैं। ज्यादातर मामलों में यह मान लिया जाता है कि यह शरीर में सिर्फ खून की कमी यानी एनीमिया (Anemia) या हीमोग्लोबिन के कम होने का लक्षण है, जिसके लिए आयरन की गोलियां खाकर काम चला लिया जाता है। हालांकि, मेडिकल साइंस और हृदय रोग विशेषज्ञों की हालिया रिपोर्ट्स ने इस आम धारणा को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। डॉक्टरों का यह साफ तौर पर कहना है कि महिलाओं में बार-बार सांस फूलना केवल हीमोग्लोबिन की कमी भर नहीं है, बल्कि यह इस बात का एक बहुत बड़ा और गंभीर संकेत हो सकता है कि उनके दिल (Heart) को अंदरूनी रूप से किसी विशेष जांच या मेडिकल ट्रीटमेंट की सख्त जरूरत है। समय रहते इस चेतावनी को न समझना महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हो सकता है, इसलिए इसके पीछे छिपे असल कारणों को जानना बेहद जरूरी है।
एनीमिया और दिल की कार्यप्रणाली के बीच का सीधा संबंध
एनीमिया यानी शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी होना महिलाओं में एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जिसके कारण उनके ऊतकों तक ऑक्सीजन ठीक से नहीं पहुंच पाती और उन्हें थकान महसूस होती है। जब शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है, तो दिल को शरीर के अंगों तक खून पंप करने के लिए सामान्य से कहीं ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इस अतिरिक्त दबाव के कारण हृदय की मांसपेशियों पर बुरा असर पड़ता है। लंबे समय तक एनीमिया की स्थिति बने रहने पर दिल का आकार बढ़ सकता है और हार्ट फेलियर (Heart Failure) जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं। यही वजह है कि जब कोई महिला यह कहती है कि उसका दम फूल रहा है, तो केवल आयरन का सिरप पीने के बजाय यह जांच कराना बहुत जरूरी हो जाता है कि कहीं उसका दिल इस अतिरिक्त दवाब के कारण कमजोर तो नहीं पड़ रहा है।
महिलाओं में दिल की बीमारियों के लक्षण पुरुषों से क्यों होते हैं अलग
चिकित्सा जगत में यह एक स्थापित सत्य है कि महिलाओं में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों (Cardiovascular Diseases) के लक्षण पुरुषों की तुलना में काफी अलग और छिपे हुए होते हैं। पुरुषों को जब दिल का दौरा पड़ता है, तो उन्हें आमतौर पर सीने में तेज और असहनीय दर्द महसूस होता है, जिसे वे तुरंत पहचान लेते हैं। इसके विपरीत, महिलाओं में हार्ट से जुड़ी समस्याओं की शुरुआत बहुत ही खामोश तरीके से होती है। उन्हें सीने में भारीपन या तेज दर्द महसूस होने के बजाय अत्यधिक थकान, पीठ या जबड़े में दर्द, चक्कर आना, और सबसे प्रमुख रूप से बिना किसी शारीरिक श्रम के सांस फूलने की समस्या का सामना करना पड़ता है। चूंकि ये लक्षण गैस्ट्रिक समस्याओं या आम कमजोरी जैसे प्रतीत होते हैं, इसलिए महिलाएं इन्हें नजरअंदाज कर देती हैं और जब तक वे डॉक्टर के पास पहुंचती हैं, तब तक स्थिति काफी गंभीर हो चुकी होती है।
किन संकेतों के दिखते ही तुरंत करवाएं हार्ट टेस्ट और कौन से हैं वे जरूरी परीक्षण
यदि किसी महिला को आराम करते समय भी सांस लेने में तकलीफ हो रही है, लेटने पर दम घुटने जैसा महसूस होता है, या पैरों और टखनों में बिना किसी चोट के सूजन आने लगी है, तो इसे बिल्कुल भी सामान्य नहीं मानना चाहिए। ऐसे लक्षणों के प्रकट होते ही तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करके कुछ विशेष हृदय परीक्षण करवाने की आवश्यकता होती है। इनमें सबसे पहले इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG) किया जाता है जो दिल की धड़कन की विद्युत गतिविधियों को मापता है। इसके अलावा इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram) के जरिए दिल के वाल्व और उसकी पंपिंग क्षमता की सटीक जांच की जाती है। यदि डॉक्टर को कोई संदेह होता है, तो वे ट्रेडमिल टेस्ट (TMT), ट्रोपोनिन ब्लड टेस्ट या कोरोनरी एंजियोग्राफी की सलाह भी दे सकते हैं, जिससे यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि दिल की नलियों में कोई ब्लॉकेज या कमजोरी तो नहीं है।
जीवनशैली में बदलाव और दिल की सेहत को सुरक्षित रखने के उपाय
महिलाओं को अपनी शारीरिक सेहत के प्रति जागरूक होने की सबसे ज्यादा जरूरत है, क्योंकि वे अक्सर अपने परिवार की देखभाल में खुद की सेहत को सबसे आखिर में रखती हैं। दिल को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि वे नियमित रूप से अपनी संपूर्ण हेल्थ चेकअप करवाएं, जिसमें ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच शामिल हो। इसके अलावा, अपने आहार में ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, ओमेगा-3 फैटी एसिड और पौष्टिक तत्वों को शामिल करें। रोजाना कम से कम 30 मिनट की हल्की सैर, योग, मेडिटेशन और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाकर महिलाएं दिल से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं। सांस फूलने जैसे छोटे दिखने वाले लक्षणों को नजरअंदाज करने की भूल न करें, क्योंकि सही समय पर की गई जांच किसी भी बड़ी दुर्घटना से बचा सकती है।
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