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‘भारत कोई धर्मशाला नहीं…’, घुसपैठियों के मुद्दे पर बरसे अमित शाह; देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और डेमोग्राफी के लिए बताया बड़ा खतरा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर अवैध घुसपैठियों के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार किया है। खुफिया ब्यूरो (IB) द्वारा आयोजित दो दिवसीय 'नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजीज' (NSS) सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने दो-टूक शब्दों में कहा कि "भारत कोई धर्मशाला नहीं है और यहां रहने का अधिकार केवल इस देश के वैध नागरिकों को है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध घुसपैठिए भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक संप्रभुता और जनसांख्यिकी (Demographic Profile) के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।

गृह मंत्री ने देश के सभी राज्यों की पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) और खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में सरकार का विजन साझा करते हुए कहा कि मोदी सरकार का अंतिम लक्ष्य बहुत कम समय में पूरे देश को घुसपैठियों से मुक्त करना है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प को हासिल करने की पहली बुनियादी शर्त देश की मजबूत आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था है।

सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और डेमोग्राफी के लिए घुसपैठ को बताया गंभीर संकट

गृह मंत्री ने विस्तार से समझाया कि अनियंत्रित और अवैध घुसपैठ किस प्रकार देश के विभिन्न राज्यों के संतुलन को बिगाड़ रही है। उन्होंने कहा कि घुसपैठिए न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के लिए खतरा हैं, बल्कि वे देश के संसाधनों, रोजगार और अर्थव्यवस्था पर भी अनुचित बोझ डालते हैं।

इसके साथ ही, सीमावर्ती इलाकों में हो रहे अप्राकृतिक जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Shift) आने वाले समय में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता का कारण बन सकते हैं। शाह ने कहा कि जो लोग कानूनी और वैध तरीके से देश की प्रगति और समृद्धि में योगदान देने आते हैं, उनका स्वागत है; लेकिन बिना वैध दस्तावेजों के चोरी-छिपे सीमा पार करने वालों के साथ कानून के तहत बेहद सख्ती से निपटा जाएगा।

सीमावर्ती राज्यों के साथ साझा किया 'चतुर्भुज सुरक्षा दृष्टिकोण'

अमित शाह ने सम्मेलन में जानकारी दी कि पिछले आठ महीनों के दौरान उन्होंने देश की थल सीमा से जुड़े सभी बॉर्डर राज्यों का व्यक्तिगत रूप से दौरा किया है। इन दौरों के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ सीमा सुरक्षा का एक व्यापक 'चतुर्भुज दृष्टिकोण' (Four-pronged approach) का विजन डॉक्यूमेंट साझा किया है।

इसके तहत सीमाओं पर निगरानी को अभेद्य बनाने के लिए आधुनिक तकनीक, ड्रोन, रडार, नाइट विजन कैमरे और स्मार्ट फेंसिंग का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने सभी राज्यों से सीमा सुरक्षा के समन्वय के लिए वरिष्ठ स्तर के नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आह्वान किया, ताकि केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस के बीच रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा की जा सके।

आतंकवाद पर 'प्रहार' और ड्रग्स के खिलाफ 3D फॉर्मूला

सम्मेलन के दौरान गृह मंत्री ने आतंकवाद के 360-डिग्री नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए 'प्रहार' (PRAHAR) रणनीति को रोजमर्रा की पुलिस कार्रवाई का हिस्सा बनाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, युवा पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए 'नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029' को जमीन पर लागू करने पर जोर दिया गया।

नशामुक्त भारत के लक्ष्य को पाने के लिए शाह ने 3D रणनीति अपनाने का मंत्र दिया:

  • Detect (पहचानना): ड्रग्स और तस्करी के नेटवर्क का शुरुआती स्तर पर पता लगाना।

  • Disrupt (बाधित करना): उनके लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को बीच में ही तोड़ना।

  • Destroy (नष्ट करना): तस्करी के पूरे वित्तपोषण और माफिया तंत्र को जड़ से खत्म करना।

भविष्य की चुनौतियों के लिए AI और डेटा एनालिसिस का उपयोग

गृह मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को केवल वर्तमान परिस्थितियों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। अधिकारियों को अगले 15 से 20 वर्षों के वैश्विक रुझानों, साइबर वारफेयर, ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन व्यवधान और कट्टरपंथ जैसी उभरती चुनौतियों का पहले से आकलन कर रणनीति बनानी होगी।

उन्होंने युवा सुरक्षा अधिकारियों से अपील की कि वे CCTNS, ICJS, NatGrid और NAFIS जैसे एकीकृत डेटा बैंकों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक डेटा एनालिसिस का उपयोग करें, ताकि भविष्य के किसी भी खतरे को बड़ा रूप लेने से पहले ही रोका जा सके।