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Bihar Assembly Elections : चिराग के बाद अब मांझी की मन की बात, बोले- NDA में सीटों पर अब शुरू हो जानी चाहिए चर्चा

News India Live, Digital Desk: Bihar Assembly Elections : बिहार में विधानसभा चुनाव की आहट जैसे-जैसे तेज़ हो रही है, वैसे-वैसे सत्ताधारी एनडीए (NDA) गठबंधन के अंदर सीटों के बंटवारे को लेकर भी हलचल बढ़ने लगी है। कुछ दिन पहले चिराग पासवान ने इस मुद्दे पर बात की थी और अब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और ‘हम’ पार्टी के संरक्षक जीतन राम मांझी ने भी अपनी बात रख दी है।मांझी ने साफ़-साफ़ कहा है कि अब वो समय आ गया है जब एनडीए के सभी घटक दलों को एक साथ बैठकर सीटों के बंटवारे पर चर्चा शुरू कर देनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि गठबंधन में किसी तरह का कोई मतभेद नहीं है और आखिरी फैसला एनडीए का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा।क्या कहा जीतन राम मांझी ने?पत्रकारों से बात करते हुए मांझी ने कहा, “हमारी तरफ से कोई दबाव नहीं है। हम सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में एकजुट हैं। अमित शाह जी और जे.पी. नड्डा जी जो भी फैसला लेंगे, वो हम सबको मंजूर होगा।”लेकिन इसके साथ ही उन्होंने अपनी इच्छा भी ज़ाहिर कर दी, “लेकिन हां, अब सीट बंटवारे पर बातचीत का दौर शुरू होना चाहिए ताकि चुनाव की तैयारियों को लेकर एक स्पष्टता आ सके।”गठबंधन में बढ़ रही है सीटों पर चर्चा की मांगकहानी सिर्फ मांझी तक ही सीमित नहीं है। उनसे पहले लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान और रालोम के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी कह चुके हैं कि सही समय आने पर सीटों पर बात होनी चाहिए। यानी गठबंधन के छोटे दल अब इस मुद्दे पर एक राय बनाते दिख रहे हैं कि चर्चा में और देरी नहीं होनी चाहिए।क्या है BJP का रुख?उधर, जब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बड़े सधे हुए अंदाज़ में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अभी सबका ध्यान सिर्फ एक लक्ष्य पर है- बिहार की सभी 243 सीटें जीतना। सीटों का बंटवारा कोई बड़ा मुद्दा नहीं है, नेतृत्व समय पर इसका फैसला कर लेगा।क्या हैं इसके मायने?ऊपर से देखने पर एनडीए के सभी नेता “ऑल इज वेल” का राग अलाप रहे हैं और बार-बार दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व पर भरोसा जता रहे हैं। लेकिन जिस तरह से एक के बाद एक नेता अब खुलकर सीट बंटवारे पर चर्चा शुरू करने की मांग कर रहे हैं, उससे साफ़ है कि गठबंधन के अंदर इस बात को लेकर एक बेचैनी और उत्सुकता का माहौल है। अब गेंद पूरी तरह से बीजेपी के पाले में है कि वह अपने सहयोगियों के साथ यह ‘मुश्किल’ बातचीत कब शुरू करती है।