
News India Live, Digital Desk : बॉलीवुड में जब भी दमदार एक्शन और जोरदार डायलॉग्स की बात होती है, तो सनी देओल का चेहरा सबसे पहले आंखों के सामने आता है। पर्दे पर दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले और हैंडपंप उखाड़ने वाले इस ‘हीरो’ की असल जिंदगी की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर शायद आपको यकीन न हो।हाल ही में एक इंटरव्यू में सनी देओल ने अपनी जिंदगी का एक बहुत ही बड़ा और निजी राज खोला। उन्होंने बताया कि वह डिस्लेक्सिया (Dyslexia) नाम की एक मेडिकल कंडीशन से जूझ रहे हैं। यह वही समस्या है जो आमिर खान की फिल्म ‘तारे जमीन पर’ में बच्चे ईशान अवस्थी को थी।क्या है डिस्लेक्सिया?यह कोई दिमागी बीमारी नहीं है, बल्कि एक तरह की ‘लर्निंग डिसऑर्डर’ है। इसमें इंसान को अक्षरों को पहचानने, पढ़ने और लिखने में मुश्किल होती है। शब्द उल्टे-पुल्टे नजर आते हैं और वाक्य बनाने में दिक्कत होती है। इसका बुद्धिमानी या आईक्यू से कोई लेना-देना नहीं होता।”बचपन में बहुत डांट पड़ती थी…”सनी देओल ने बताया कि बचपन में उन्हें इस वजह से बहुत परेशानी उठानी पड़ी। स्कूल में जब उन्हें कुछ पढ़ने के लिए कहा जाता था, तो वह पढ़ नहीं पाते थे। इस वजह से उन्हें खूब डांट भी पड़ती थी और लोग उन्हें ‘बेवकूफ’ या ‘पढ़ाई में कमजोर’ समझते थे। उस समय लोगों को इस कंडीशन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी।उन्होंने बताया, “मुझे टेलीप्रॉम्प्टर से पढ़ने में आज भी बहुत दिक्कत होती है। इसलिए मैं अक्सर सेट पर किसी से कह देता हूं कि मुझे डायलॉग्स पढ़कर सुना दो, मैं समझकर बोल लूंगा।”सनी देओल ने यह भी बताया कि उनका आईक्यू लेवल बहुत हाई (160 से ज्यादा) है, लेकिन डिस्लेक्सिया की वजह से उन्हें अक्षरों की दुनिया को समझने में हमेशा एक चुनौती का सामना करना पड़ा।यह खुलासा वाकई हैरान करने वाला है। जिस एक्टर ने अपने डायलॉग्स से सिनेमाघरों में तूफान ला दिया, उसने असल जिंदगी में शब्दों को समझने के लिए एक लंबा संघर्ष किया है। यह कहानी हमें सिखाती है कि किसी भी इंसान को सिर्फ उसकी अकादमिक काबिलियत से नहीं आंकना चाहिए। सनी देओल की यह हिम्मत और कामयाबी उन लाखों लोगों के लिए एक प्रेरणा है जो इस तरह की मुश्किलों से जूझ रहे हैं।
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