
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK की धरती पर एक बार फिर से दबी हुई चिंगारी भड़क उठी है और वहां के अवाम के बीच इस्लामाबाद की दमनकारी नीतियों के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान की दमनकारी हुकूमत और वहां की बदहाल आर्थिक व्यवस्था से आजिज आ चुके स्थानीय लोगों ने अब खुलकर बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। इसी कड़ी में जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ एक नए और बड़े पैमाने पर जनांदोलन का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस घोषणा के बाद से ही PoK के विभिन्न इलाकों में हलचल तेज हो गई है और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों तथा प्रशासन के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खिंच गई हैं। स्थानीय जनता का यह बढ़ता हुआ गुस्सा इस बात का साफ संकेत है कि अब वहां के लोग पाकिस्तान के अवैध कब्जे और शोषण को और अधिक बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।
JKJAAC का नया आंदोलन और जनता की बुनियादी मांगें
जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) पिछले कुछ समय से PoK के आम नागरिकों के अधिकारों की आवाज उठाने वाला सबसे मजबूत मंच बनकर उभरा है। इस नए आंदोलन के तहत स्थानीय लोगों ने बिजली की भारी-भरकम दरों, आसमान छूती महंगाई, बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी और पाकिस्तानी हुक्मरानों द्वारा क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों की हो रही अंधाधुंध लूट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति के नेताओं का कहना है कि पाकिस्तान की सरकार ने दशकों से इस क्षेत्र के लोगों को केवल शोषण और गरीबी के सिवाय कुछ नहीं दिया है। जब भी स्थानीय अवाम अपनी बुनियादी जरूरतों और अधिकारों के लिए आवाज उठाती है, तो पाकिस्तानी सेना और पुलिस बल उन पर गोलियां बरसाने और उन्हें गिरफ्तार करने से पीछे नहीं हटते। इस बार JKJAAC ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका यह नया आंदोलन तब तक नहीं रुकेगा जब तक उनकी सभी जायज मांगें पूरी नहीं हो जातीं।
पाकिस्तानी हुक्मरानों के होश फाख्ता और दमनकारी नीतियां
PoK में सुलग रही इस नई आग और जन-आंदोलन के ऐलान से इस्लामाबाद के हुक्मरानों के होश फाख्ता हो गए हैं। पाकिस्तान की संघीय सरकार और वहां की खुफिया एजेंसियां इस बात से सबसे ज्यादा डरी हुई हैं कि यदि यह आंदोलन पिछले प्रदर्शनों की तरह एक बार फिर से बेकाबू हो गया, तो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का असली और क्रूर चेहरा पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो जाएगा। इस स्थिति से निपटने के लिए पाकिस्तानी प्रशासन ने एक बार फिर से दमनकारी हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए हैं। इंटरनेट सेवाओं को बाधित करने, स्थानीय नेताओं को नजरबंद करने और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती करने के गुप्त निर्देश दिए जा चुके हैं। हालांकि, इन तमाम प्रशासनिक और सैन्य ज्यादतियों के बावजूद PoK के आम नागरिकों के हौसले बुलंद हैं और वे अपनी आजादी तथा अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को पूरी तरह तैयार बैठे हैं।
भारत और वैश्विक मंच पर इस सुलगती बगावत के कूटनीतिक मायने
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले इस क्षेत्र में लगातार सुलग रही बगावत की आग पर भारत की नजरें भी बहुत ही पैनी बनी हुई हैं। भारत सरकार ने हमेशा से यह स्पष्ट किया है कि PoK भारत का अभिन्न अंग है और वहां के लोगों का दर्द हर भारतीय महसूस करता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का यह मानना है कि पाकिस्तान खुद अपने ही देश के भीतर गंभीर आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और प्रांतीय बगावत से जूझ रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के बाद अब PoK में उठने वाली यह बगावत की आंधी पाकिस्तान के विघटन की पटकथा को और अधिक तेज कर सकती है। दुनिया के तमाम मानवाधिकार संगठन भी अब PoK में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों पर सवाल उठाने लगे हैं। आने वाले दिनों में JKJAAC का यह नया आंदोलन पाकिस्तान की नींव हिलाने के लिए काफी साबित हो सकता है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि अन्याय और अत्याचार की दीवारें अब ज्यादा दिनों तक टिकने वाली नहीं हैं।
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