
Choti Diwali 2025 date : दिवाली के महापर्व की जब बात होती है,तो हमारे मन में दीयों की जगमगाहट,मिठाइयों की मिठास और माँ लक्ष्मी के आगमन का ख़याल आता है। लेकिन दिवाली की रात से ठीक एक दिन पहले,एक और बहुत ख़ास दिन मनाया जाता है-छोटी दिवाली।यह दिन धनतेरस के ठीक अगले दिन और दिवाली से एक दिन पहले आता है। आज के दिन से ही घरों में असली रौनक़ शुरू होती है-घर सजते हैं,रंगोलियाँ बनती हैं और हर कोना दीयों की रोशनी से जगमगाने लगता है। लेकिन इस दिन की सबसे ख़ास और ज़रूरी परंपरा है,यमराज के नाम का एक दीयाघर के बाहर जलाना।कहा जाता है कि शाम के वक़्त,घर के दरवाज़े पर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके एक दीया जलाने से’अकाल मृत्यु’,यानी समय से पहले होने वाली मौत का डर ख़त्म हो जाता है और मृत्यु के देवता यमराज का आशीर्वाद मिलता है।पर इसका नाम’नरक’चतुर्दशी क्यों पड़ा?यह नाम सुनने में भले ही थोड़ा अजीब लगता हो,लेकिन इसके पीछे एक बहुत बड़ी और बहादुरी की कहानी छुपी है,जो बुराई पर अच्छाई की जीत की सबसे बड़ी मिसाल है।पौराणिक कथाओं के अनुसार,नरकासुरनाम का एक बहुत ही अत्याचारी और ताक़तवर राक्षस था। वह इतना क्रूर था कि देवता और इंसान,दोनों ही उसके नाम से काँपते थे। उसने अपनी ताक़त के दम पर देवताओं को हराकर उनका ख़ज़ाना लूट लिया और सबसे बड़ा पाप यह किया कि16,000औरतों को बंदी बना लिया।जब उसके पापों का घड़ा भर गया,तो सभी देवता मदद के लिए भगवान श्री कृष्ण के पास पहुँचे। भगवान कृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ नरकासुर से युद्ध करने गए। एक भयानक लड़ाई के बाद,श्री कृष्ण ने अपनेसुदर्शन चक्रसे नरकासुर का सिर धड़ से अलग कर दिया।इसके बाद,उन्होंने उन सभी16,000महिलाओं को उस राक्षस की क़ैद से आज़ाद कराया और उन्हें सम्मान देने के लिए उनसे विवाह किया। इसी जीत की याद में,और नरकासुर के अंत के प्रतीक के रूप में इस दिन कोनरक चतुर्दशीकहा जाता है।यह दिन सिर्फ़ दीये जलाने का नहीं,बल्कि यह याद करने का भी दिन है कि अँधेरा चाहे कितना भी घना क्यों न हो,रोशनी की एक किरण उसे ख़त्म करने के लिए काफ़ी होती है।
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