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Cyber Fraud Refund: अब ऑनलाइन ठगी का शिकार होने पर “घर बैठे” मिलेगा पैसा; सरकार ने लॉन्च किया नया ‘मोबाइल रेस्टोरेशन मॉड्यूल’

"मेरे बैंक खाते से किसी ने धोखाधड़ी (फ्रॉड) करके पैसे निकाल लिए, अब क्या वे पैसे वापस मिल सकते हैं?" आज के दौर में साइबर ठगी के शिकार होने वाले लाखों भारतीयों के लिए यह सबसे बड़ा और चिंताजनक सवाल होता है। अब तक ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने के बाद पीड़ितों को अपनी ही गाढ़ी कमाई वापस पाने के लिए पुलिस थानों, बैंकों और अदालतों के बीच एक बेहद लंबी व थकाऊ कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। कई मामलों में साइबर पुलिस द्वारा अपराधी का बैंक खाता फ्रीज (Freeze) कर दिए जाने के बावजूद पीड़ित को पैसा वापस मिलने में महीनों या सालों लग जाते थे।

इसी बड़ी चुनौती को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने एक क्रांतिकारी डिजिटल पहल करते हुए 'मोबाइल रेस्टोरेशन मॉड्यूल' (Mobile Restoration Module – MRM) की शुरुआत की है। यह राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) का एक नया एडवांस डिजिटल एक्सटेंशन है, जिसका मुख्य उद्देश्य साइबर अपराध के पीड़ितों को ऑनलाइन माध्यम से उनकी फंसी हुई रकम बेहद आसानी और पारदर्शिता से वापस दिलाना है। आइए इस विस्तृत एक्सप्लेनर में समझते हैं कि यह नया सिस्टम कैसे काम करता है, इसमें रिफंड के क्या नियम हैं और आप घर बैठे इसके लिए कैसे आवेदन कर सकते हैं।

इस नए रिफंड मॉड्यूल की आखिर जरूरत क्यों पड़ी?

भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यूपीआई (UPI), नेट बैंकिंग, ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया ने देश के करोड़ों नागरिकों को ऑनलाइन दुनिया से सीधे जोड़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के 86 प्रतिशत से अधिक घर वर्तमान में इंटरनेट से जुड़े हुए हैं। लेकिन जितनी तेज रफ्तार से डिजिटल सेवाएं बढ़ीं, उतनी ही चालाकी से साइबर अपराधियों का नेटवर्क भी मजबूत हुआ।

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि:

  • साल 2022 में देश में दर्ज साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की कुल संख्या 10.29 लाख थी।

  • साल 2024 में यह आंकड़ा रिकॉर्ड तेजी से बढ़कर 22.68 लाख तक पहुंच गया। यानी केवल दो वर्षों के भीतर देश में साइबर वित्तीय अपराधों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई।

आजकल के साइबर अपराधी केवल पुराने ढर्रे के 'ओटीपी फ्रॉड' (OTP Fraud) तक सीमित नहीं हैं। अब वे ठगी के लिए डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest), फर्जी शेयर बाजार निवेश योजनाएं, पार्ट-टाइम जॉब स्कैम, फर्जी बैंक केवाईसी (KYC) अपडेट, फेक कस्टमर केयर नंबर्स और सोशल मीडिया पर पहचान चुराने (Impersonation) जैसे बेहद जटिल और नए कूटनीतिक हथकंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या यह आती थी कि अगर पीड़ित समय रहते शिकायत कर भी दे और ठगी का पैसा बैंकिंग चैनल में फ्रीज हो जाए, तब भी अदालती और प्रशासनिक पेचीदगियों के कारण पीड़ित को रिफंड नहीं मिल पाता था। MRM मॉड्यूल इसी समस्या का सटीक समाधान है।

क्या हर किसी को पैसा वापस मिलेगा? जानिए 2 सबसे जरूरी शर्तें

यह समझना बेहद जरूरी है कि मोबाइल रेस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) कोई जादू की छड़ी नहीं है। इस डिजिटल सिस्टम के जरिए पीड़ित को रिफंड केवल तभी मिल सकता है, जब निम्नलिखित दो सबसे महत्वपूर्ण और अनिवार्य शर्तें पूरी होती हों:

  • पहली शर्त (गोल्डन ऑवर में तुरंत शिकायत): ठगी का पता चलते ही पीड़ित ने बिना एक मिनट गंवाए तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराई हो, या साइबर अपराध पोर्टल (NCRP) पर ऑनलाइन शिकायत रजिस्टर्ड की हो।

  • दूसरी शर्त (फ्रीज अमाउंट): ठगा गया पैसा अपराधियों द्वारा बैंक से निकाले जाने से पहले ही बैंकिंग सिस्टम में पुलिस द्वारा लोकेट (ट्रेस) करके फ्रीज कर दिया गया हो। अगर अपराधियों ने पैसा पहले ही एटीएम से निकाल लिया है या उसे क्रिप्टोकरेंसी या किसी अन्य माध्यम में बदल लिया है, तो इस मॉड्यूल के जरिए रिफंड संभव नहीं होगा। इसीलिए विशेषज्ञ हमेशा कहते हैं कि साइबर फ्रॉड के मामलों में शुरुआती कुछ मिनट (Golden Hours) सबसे कीमती होते हैं।

रिफंड की तीन सरकारी श्रेणियां (Refund Categories)

I4C ने पीड़ितों की सुविधा और प्रक्रिया को तेज करने के लिए रिफंड राशि के आधार पर तीन अलग-अलग श्रेणियां (Slabs) तय की हैं:

श्रेणियां (Categories) फ्रीज की गई राशि का दायरा रिफंड के लिए नियम व आवश्यक दस्तावेज
श्रेणी 1 ₹50,000 तक की राशि इसके लिए न तो एफआईआर (FIR) की जरूरत है और न ही कोर्ट के आदेश की। केवल शुरुआती पुलिस कंप्लेंट के आधार पर ही ऑनलाइन रिफंड प्रोसेस हो जाएगा।
श्रेणी 2 ₹50,000 से अधिक (पर कई खातों में बंटी हुई) यदि कुल ठगी ₹80,000 की हुई है, लेकिन वह राशि अपराधियों के अलग-अलग खातों में बंटी है और किसी भी एक खाते में ₹50,000 से ज्यादा नहीं है, तो भी FIR या कोर्ट ऑर्डर की आवश्यकता नहीं होगी
श्रेणी 3 एक ही खाते में ₹50,000 से अधिक यह सबसे संवेदनशील श्रेणी है। यदि किसी एक ही बैंक खाते में ₹50,000 से अधिक की रकम फ्रीज हुई है, तो रिफंड के लिए FIR दर्ज कराना और संबंधित अदालत का आधिकारिक आदेश (Court Order) लेना अनिवार्य होगा

MRM पोर्टल पर रिफंड के लिए आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Guide)

यदि आपकी ठगी गई रकम बैंक खाते में फ्रीज हो चुकी है, तो अपना पैसा वापस पाने के लिए आपको नीचे दिए गए आसान डिजिटल स्टेप्स को फॉलो करना होगा:

  • स्टेप 1 (पोर्टल लॉगिन): सबसे पहले मोबाइल रेस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं और वहां दिए गए 'सिटिजन लॉगिन' (Citizen Login) बटन पर क्लिक करें।

  • स्टेप 2 (वेरिफिकेशन): लॉग इन करने के लिए अपने उसी मोबाइल नंबर का उपयोग करें, जिसका इस्तेमाल आपने NCRP पोर्टल पर साइबर क्राइम की शुरुआती शिकायत दर्ज करते समय किया था। ओटीपी के जरिए इसे वेरिफाई करें।

  • स्टेप 3 (कंप्लेंट आईडी दर्ज करें): पोर्टल के भीतर 'रेज रिफंड रिक्वेस्ट' (Raise Refund Request) सेक्शन में जाएं और अपनी 14-अंकों वाली डिजिटल कंप्लेंट आईडी दर्ज करें (यह आईडी आपको साइबर शिकायत दर्ज करते समय एसएमएस या ईमेल पर मिली थी)।

  • स्टेप 4 (दस्तावेज अपलोड): इसके बाद मांगे गए आवश्यक दस्तावेज जैसे—आपका पैन (PAN) कार्ड, प्रभावित बैंक खाते की पासबुक या स्टेटमेंट डिटेल्स और यदि आपकी राशि श्रेणी-3 में आती है तो FIR की कॉपी व अदालती आदेश को स्कैन करके अपलोड कर दें।

  • स्टेप 5 (ट्रैकिंग कोड): फॉर्म को सफलतापूर्वक सबमिट करने के बाद, पोर्टल द्वारा एक विशेष ट्रैकिंग कोड जनरेट किया जाएगा, जो हमेशा 'MR2026' से शुरू होगा। इस यूनिक कोड की मदद से आप भविष्य में कभी भी अपने रिफंड का लाइव स्टेटस (Live Status) ऑनलाइन चेक कर सकते हैं।

'संचार साथी' (Sanchar Saathi): अपराध को रोकने वाला डिजिटल ढाल

जहां एक तरफ गृह मंत्रालय का MRM मॉड्यूल ठगी के बाद पैसा वापस दिलाने का काम करता है, वहीं दूसरी तरफ दूरसंचार विभाग (DoT) का 'संचार साथी' (Sanchar Saathi) पोर्टल और मोबाइल ऐप अपराधियों को ठगी करने से रोकने का सबसे बड़ा हथियार है। चूंकि साइबर अपराध का एक बहुत बड़ा हिस्सा फर्जी सिम कार्ड्स और चोरी के मोबाइलों के जरिए होता है, इसलिए इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए ही 17 जनवरी 2025 को संचार साथी ऐप लॉन्च किया गया था।

संचार साथी की मुख्य विशेषताएं और नागरिक सेवाएं:

  1. चोरी का मोबाइल ब्लॉक करना: इसके जरिए देश का कोई भी नागरिक अपना खोया या चोरी हुआ स्मार्टफोन देश भर में ब्लॉक कर सकता है।

  2. IMEI ट्रैकिंग: चोरी हुए हैंडसेट के इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी (IMEI) नंबर को लाइव ट्रैक किया जा सकता है।

  3. सिम कार्ड की जांच: आपके नाम पर देश में कुल कितने सिम कार्ड चल रहे हैं, इसकी लाइव जांच करके आप संदिग्ध सिम को तुरंत बंद करवा सकते हैं।

  4. फर्जी संदेशों की शिकायत: संदिग्ध कॉल, स्पैम मैसेजेस और व्हाट्सएप फ्रॉड लिंक्स की सीधी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

रिकवरी के चौंकाने वाले आंकड़े: दूरसंचार विभाग के आधिकारिक डेटा के अनुसार, अक्टूबर 2025 में पहली बार भारत में एक ही महीने के भीतर 50,000 से अधिक चोरी के मोबाइल रिकवर किए गए थे। अब तक देश भर में इस पोर्टल की मदद से 7 लाख से अधिक मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं, यानी औसतन हर एक मिनट में एक से अधिक चोरी का मोबाइल फोन पुलिस द्वारा खोजा जा रहा है। इसके अलावा, इस सिस्टम की मदद से साइबर अपराधों में संलिप्त 9.42 लाख से अधिक संदिग्ध सिम कार्ड्स और 2.63 लाख से अधिक IMEI नंबरों को हमेशा के लिए ब्लॉक (ब्लैकलिस्ट) किया जा चुका है।

साइबर सुरक्षा पर सरकार का बजटीय खर्च

देश में बढ़ते साइबर हमलों और संवेदनशील डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने अपने बजटीय आवंटन में भी बड़ी बढ़ोतरी की है। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In (इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम) के लिए पिछले चार वर्षों में औसतन 255 से 277 करोड़ रुपये के बीच का सालाना बजट आवंटित किया गया है।

वित्त वर्ष 2025-26 में इस एजेंसी के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाकर 277 करोड़ रुपये किया गया था, जबकि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए 269 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान रखा गया है। कुल मिलाकर देखा जाए तो डिजिटल दुनिया के नियामक प्राधिकरणों के लिए इस वर्ष 464 करोड़ रुपये का बड़ा फंड रखा गया है, जिसमें CERT-In की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है। यह राशि अत्याधुनिक साइबर हमलों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, राष्ट्रीय सुरक्षा अलर्ट जारी करने और देश की डिजिटल क्षमता व साइबर वॉरफेयर को अपग्रेड करने पर खर्च की जा रही है।