
News India Live, Digital Desk : दिल्ली की सिख राजनीति में एक ऐसा फैसला लिया गया है, जिसने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने एक ऐतिहासिक और बेहद सख्त कदम उठाते हुए तीन बड़े सिख नेताओं—परमजीत सिंह सरना, हरविंदर सिंह सरना (सरना बंधु) और कमेटी के पूर्व अध्यक्षमनजीत सिंह जीके— की सदस्यता को रद्द कर दिया है।यह फैसला DSGMC के जनरल हाउस में एक प्रस्ताव पास करके लिया गया। इस प्रस्ताव में इन तीनों नेताओं पर’पंथ विरोधी’ गतिविधियों में शामिल होने और सिख संस्थाओं को कमजोर करने जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस फैसले के बाद अब ये तीनों नेता DSGMC का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे और कमेटी की किसी भी गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।क्यों लिया गया इतना बड़ा और सख्त फैसला?DSGMC के मौजूदा प्रबंधन ने इन नेताओं पर सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई गंभीर आरोप लगाए हैं। जनरल हाउस में पास हुए प्रस्ताव के मुताबिक, इन पर लगे मुख्य आरोप इस तरह हैं:गुरु की गोलक में हेराफेरी: इन पर अपने-अपने कार्यकाल के दौरान गुरुद्वारे की गोलक (दान पात्र) के पैसों का दुरुपयोग करने का भी आरोप है। कहा गया है कि इन्होंने कमेटी की संपत्तियों और संस्थाओं, खासकर गुरु हरकिशन पब्लिक स्कूलों में वित्तीय अनियमितताएं कीं।मनजीत सिंह GK पर विशेष आरोप: मनजीत सिंह जीके पर उनके अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान किताबों के ठेके में रिश्वत लेने और अन्य वित्तीय घोटालों के गंभीर इल्जाम हैं।सरना बंधुओं पर आरोप: सरना बंधुओं पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कमेटी की जमीनों के सौदे में गड़बड़ियां कीं और कमेटी की वित्तीय हालत को कमजोर किया।यह सिर्फ सदस्यता रद्द करना नहीं, सियासी ‘वनवास’ है!राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्रवाई सिर्फ धार्मिक आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ीसियासी चाल भी है।चुनाव का रास्ता साफ: इस कदम से आगामी DSGMC चुनावों में मौजूदा प्रबंधन के लिए राह काफी आसान हो गई है।यह फैसला दिल्ली की सिख राजनीति में एक नए और शायद और भी तीखे टकराव की शुरुआत है। अब देखना यह होगा कि सरना बंधु और मनजीत सिंह जीके इस फैसले को कानूनी चुनौती देते हैं या फिर सड़कों पर उतरकर इसका राजनीतिक जवाब देंगे।
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