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Health Insurance कंपनी से हैं परेशान? अब मोबाइल नंबर की तरह पॉलिसी भी कराएं पोर्ट, नहीं होगा कोई नुकसान

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हम सब अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को एक लंबी अवधि का साथी मानकर खरीदते हैं। लेकिन कई बार, यह साथ बोझ लगने लगता है। खराब सर्विस, हर साल बढ़ता हुआ प्रीमियम, या क्लेम के समय होने वाली आनाकानी… वजहें कई हो सकती हैं जब हमें लगता है कि काश हम अपनी बीमा कंपनी बदल पाते!

ज्यादातर लोग ऐसा करने से इसलिए डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि नई कंपनी में जाने से उनके सालों से जमा हुए फायदे (जैसे पुरानी बीमारियों का कवर) खत्म हो जाएंगे और उन्हें सब कुछ जीरो से शुरू करना पड़ेगा।

लेकिन अगर हम आपसे कहें कि आप अपना मोबाइल नंबर बदले बिना जैसे टेलीकॉम कंपनी बदल लेते हैं, ठीक वैसे ही आप अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को भी एक कंपनी से दूसरी कंपनी में ‘पोर्ट’ करा सकते हैं, वो भी बिना अपने पुराने फायदे गंवाए!

क्यों पड़ती है पॉलिसी पोर्ट करने की जरूरत?

आप इन वजहों से अपनी बीमा कंपनी बदलने के बारे में सोच सकते हैं:

  • बढ़ता हुआ प्रीमियम: आपकी मौजूदा कंपनी हर साल बहुत ज्यादा प्रीमियम बढ़ा रही है।
  • खराब सर्विस: कंपनी का कस्टमर केयर आपकी सुनता ही नहीं।
  • धीमा क्लेम सेटलमेंट: क्लेम का पैसा मिलने में महीनों लग जाते हैं।
  • बेहतर कवर की तलाश: कोई दूसरी कंपनी उसी प्रीमियम में ज्यादा बेहतर सुविधाएं और कवर दे रही है।
  • अस्पतालों का छोटा नेटवर्क: आपके घर के पास के अच्छे अस्पताल आपकी बीमा कंपनी के नेटवर्क में शामिल नहीं हैं।

पोर्ट करने का सबसे बड़ा ‘जादू’ क्या है? (यह जानना बहुत जरूरी है)

पॉलिसी पोर्ट करने का सबसे बड़ा और जादुई फायदा है आपके ‘वेटिंग पीरियड’ का ट्रांसफर हो जाना।

  • यह क्या होता है? जब भी आप कोई नई हेल्थ पॉलिसी लेते हैं, तो पहले से मौजूद बीमारियों (जैसे- शुगर, BP) का कवर तुरंत शुरू नहीं होता। इसके लिए 2 से 4 साल का एक ‘इंतजार का समय’ यानी वेटिंग पीरियड होता है।
  • पोर्ट करने का फायदा: मान लीजिए, आपकी पुरानी पॉलिसी में 4 साल का वेटिंग पीरियड था और आप उसे 3 साल से चला रहे हैं। अब जब आप नई कंपनी में पोर्ट करेंगे, तो आपको वहां दोबारा 4 साल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा! आपको सिर्फ बचा हुआ 1 साल का वेटिंग पीरियड ही पूरा करना होगा। आपके पुराने 3 साल गिने जाएंगे।

इसके अलावा, आपको मिला हुआ नो-क्लेम बोनस (NCB) भी अक्सर नई पॉलिसी में ट्रांसफर हो जाता है।

कैसे करें अपनी पॉलिसी को पोर्ट? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)

यह प्रक्रिया बहुत आसान है, बस सही समय पर करनी होती है।

  1. 45 दिन पहले करें तैयारी: यह सबसे जरूरी नियम है। आपको अपनी मौजूदा पॉलिसी के खत्म (expire) होने से कम से-कम 45 दिन पहले नई कंपनी को पोर्ट करने के लिए सूचित करना होता है।
  2. नई कंपनी चुनें: अच्छी तरह से रिसर्च करके वह नई कंपनी चुनें जहां आप जाना चाहते हैं।
  3. फॉर्म भरें: आपको नई कंपनी का एक प्रपोजल फॉर्म और एक पोर्टेबिलिटी फॉर्म भरना होगा, जिसमें आपको अपनी पुरानी पॉलिसी की जानकारी देनी होगी।
  4. बाकी काम कंपनी करेगी: इसके बाद, आपकी नई बीमा कंपनी खुद आपकी पुरानी कंपनी से संपर्क करके आपके सारे रिकॉर्ड (जैसे आपका क्लेम हिस्ट्री और मेडिकल रिकॉर्ड) मांगेगी।
  5. प्रीमियम जमा करें: जब नई कंपनी आपकी एप्लीकेशन स्वीकार कर लेती है, तो आपको बस प्रीमियम जमा करना होता है और आपकी पॉलिसी पोर्ट हो जाती है।

इन बातों का रखें खास ध्यान:

  • एप्लीकेशन रिजेक्ट भी हो सकती है: नई कंपनी आपकी उम्र, स्वास्थ्य और क्लेम हिस्ट्री के आधार पर आपकी एप्लीकेशन को रिजेक्ट भी कर सकती है।
  • प्रीमियम बदल सकता है: नई कंपनी का प्रीमियम आपकी उम्र और उनकी पॉलिसी के नियमों के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है।
  • पॉलिसी टूटने न दें: यह पूरा प्रोसेस अपनी पुरानी पॉलिसी के खत्म होने से पहले ही पूरा कर लें, वरना आपके सारे फायदे खत्म हो जाएंगे।

अब हेल्थ इंश्योरेंस एक बंधन नहीं, बल्कि एक सुविधा है, जहां आपके पास बेहतर सर्विस चुनने का पूरा अधिकार है।

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