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India-EU FTA : भारत ने खोला नया आर्थिक मोर्चा, यूरोपीय संघ से डील ने उड़ाई पाकिस्तान की नींद, बर्बाद होगा पड़ोसी देश का कपड़ा उद्योग!

News India Live, Digital Desk: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने पाकिस्तान के आर्थिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। भारत की इस ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’ से पाकिस्तान का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाने वाला टेक्सटाइल (कपड़ा) सेक्टर ढहने की कगार पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील के बाद यूरोपीय बाजारों में भारतीय कपड़ों की धमक बढ़ेगी, जिससे पाकिस्तानी निर्यातकों के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाएगा।पाकिस्तान का ‘GSP Plus’ स्टेटस अब बेअसर!अब तक पाकिस्तान को यूरोपीय संघ से ‘GSP Plus’ दर्जे के तहत टैक्स में भारी छूट मिलती थी, जिसका फायदा उठाकर वह यूरोपीय बाजारों में अपने कपड़े सस्ते दामों पर बेचता था। लेकिन भारत-EU FTA के बाद अब भारतीय गारमेंट्स और टेक्सटाइल उत्पादों को भी वैसी ही या उससे बेहतर पहुंच मिलेगी। भारत के पास पाकिस्तान की तुलना में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़ी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता है, जो पाकिस्तान के लिए ‘डेथ वारंट’ साबित हो सकती है।कपड़ा उद्योग पर संकट: क्यों डर रहा है इस्लामाबाद?पाकिस्तान की कुल विदेशी मुद्रा आय का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा टेक्सटाइल निर्यात से आता है। पाकिस्तान के आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के साथ इस बड़ी डील के बाद:मार्केट शेयर का नुकसान: यूरोपीय खरीदार अब गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी के लिए भारत की ओर रुख करेंगे।प्रतिस्पर्धा में पिछड़ना: भारत में बिजली और लॉजिस्टिक्स की लागत पाकिस्तान के मुकाबले कम है, जिससे भारतीय उत्पाद सस्ते होंगे।बेरोजगारी का डर: यदि टेक्सटाइल मिलें बंद हुईं, तो पाकिस्तान में लाखों लोग सड़क पर आ सकते हैं।भारत की ‘आर्थिक कूटनीति’ ने दी मातपीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले कुछ समय में ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अब यूरोपीय संघ के साथ जिस तरह से व्यापारिक समझौते किए हैं, उसने पाकिस्तान को वैश्विक व्यापार मानचित्र पर अलग-थलग कर दिया है। जहाँ भारत ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए ग्लोबल हब बन रहा है, वहीं पाकिस्तान अभी भी कर्ज और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।अमर उजाला विशेष: क्या बचेगा पाकिस्तान का टेक्सटाइल सेक्टर?इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंकों ने चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान ने अपनी नीतियों में तुरंत सुधार नहीं किया, तो यूरोपीय बाजारों से उसका बोरिया-बिस्तर सिमट सकता है। पाकिस्तानी कपड़ा उद्योग पहले ही बढ़ती बिजली कीमतों और कच्चे माल की कमी से जूझ रहा है। अब भारत की इस नई चुनौती ने जलती आग में घी डालने का काम किया है