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Lucknow Mayor News: अब DM और कमिश्नर संभालेंगे लखनऊ नगर निगम, हाईकोर्ट ने मेयर के खिलाफ शुरू की अवमानना की कार्रवाई

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बेहद चौंकाने वाली और प्रशासनिक गलियारों को हिला देने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लखनऊ नगर निगम की मेयर सुषमा खर्कवाल के खिलाफ एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मेयर सुषमा खर्कवाल के सभी वित्तीय (Financial) और प्रशासनिक (Administrative) अधिकारों को तत्काल प्रभाव से सीज़ (रोक लगा दी) कर दिया है। उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय इतिहास में यह संभवतः पहला मामला है, जब किसी बड़े शहर के निर्वाचित मेयर के खिलाफ अदालत द्वारा इस तरह की कूटस्थ और अभूतपूर्व कार्रवाई की गई है। यह पूरा विवाद एक निर्वाचित पार्षद को पद की गोपनीयता की शपथ न दिलाने और न्यायपालिका के आदेशों की लगातार अवहेलना करने से जुड़ा हुआ है। क्या है पूरा मामला? फैजुल्लागंज वार्ड से शुरू हुआ विवाद यह पूरा मामला लखनऊ नगर निगम चुनाव के दौरान फैजुल्लागंज वार्ड से शुरू हुआ था। इस वार्ड से ललित किशोर तिवारी भारी मतों से चुनाव जीतकर आधिकारिक रूप से पार्षद चुने गए थे। लेकिन मतगणना के बाद एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई, जहाँ ललित किशोर तिवारी की जीत का प्रमाण पत्र (Certificate) कथित तौर पर किसी दूसरे व्यक्ति को सौंप दिया गया। इस गंभीर धांधली और अन्याय के खिलाफ ललित किशोर तिवारी ने बिना समय गंवाए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने ललित किशोर तिवारी के पक्ष में फैसला सुनाया और लखनऊ नगर निगम प्रशासन व मेयर को आदेश जारी किया कि उन्हें तुरंत पार्षद पद की संवैधानिक शपथ दिलाई जाए। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की भी कर दी गई अनदेखी हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद भी मेयर सुषमा खर्कवाल ने निर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ दिलाने से साफ इनकार कर दिया। इस फैसले को मानने के बजाय मेयर ने हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती देते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख किया। न्यायपालिका का कड़ा रुख: सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को पूरी तरह सही और तर्कसंगत ठहराया। देश की शीर्ष अदालत ने मेयर को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे अविलंब पार्षद को पद की शपथ दिलाएं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख और निर्देश के बावजूद मेयर ने आदेश का पालन नहीं किया। हाईकोर्ट ने झाड़ी फटकार; अब जिलाधिकारी और कमिश्नर संभालेंगे कमान सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय दोनों के आदेशों की लगातार अनदेखी किए जाने पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने इसे सीधे तौर पर न्यायपालिका की अवहेलना और 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट' (Contempt of Court) माना। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए न केवल मेयर सुषमा खर्कवाल के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों को फ्रीज कर दिया, बल्कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की गंभीर कानूनी कार्रवाई शुरू करने के भी कड़े निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद अब लखनऊ नगर निगम का पूरा कामकाज और वित्तीय फैसले मेयर के बजाय लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) और नगर निगम कमिश्नर संयुक्त रूप से संभालेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्रवाई से प्रदेश की स्थानीय राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है।