
एलोवेरा अपनी पत्तियों में पानी जमा करता है। पौधे को ज़्यादा पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं और पत्तियाँ पीली या मुलायम हो सकती हैं।जब एलोवेरा के पौधे वाली मिट्टी सूख जाए, तो उसमें 2-3 इंच पानी डालें। फिर सुनिश्चित करें कि गमले से पानी अच्छी तरह निकल जाए।आप पौधों की मिट्टी में रेत, प्यूमिस, परलाइट मिला सकते हैं। टेराकोटा या सिरेमिक गमलों में पौधे उगाना भी फायदेमंद होता है।एलोवेरा के पौधों को ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां 5-6 घंटे धूप मिले।यदि आप पौधे के गमले को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं, तो ध्यान रखें कि तापमान में अचानक परिवर्तन न हो।एलोवेरा को ज़्यादा खाद की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन इसे लंबे समय तक एक ही गमले में रखने से मिट्टी के पोषक तत्व कम हो सकते हैं। साल में एक या दो बार हल्का, संतुलित तरल खाद का इस्तेमाल करें।एलोवेरा एक गर्म जलवायु वाला पौधा है। 10°C से कम तापमान पर यह कमज़ोर हो सकता है। सर्दियों के महीनों में इसे घर में किसी गर्म जगह पर रखें।
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