
News India Live, Digital Desk: जम्मू के आरएस पुरा की बासमती, जो अपनी बेमिसाल खुशबू के लिए पूरी दुनिया में ‘किंग ऑफ राइस’ मानी जाती है, इस समय गहरे संकट में है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने समुद्री व्यापारिक मार्गों को असुरक्षित बना दिया है। इसके चलते लाखों टन बासमती चावल या तो बंदरगाहों (Ports) पर अटका पड़ा है या समुद्र के बीच कंटेनरों में फंसा हुआ है।युद्ध ने कैसे रोकी खुशबूदार चावल की रफ्तार?शिपिंग रूट्स बंद: लाल सागर (Red Sea) और स्वेज नहर के रास्ते होने वाला निर्यात लगभग बंद हो गया है। मालवाहक जहाज युद्ध क्षेत्र से गुजरने का जोखिम नहीं उठा रहे हैं।माल भाड़े में भारी उछाल: युद्ध के कारण जहाजों का किराया (Freight Rates) और बीमा प्रीमियम (Insurance) 200% से 300% तक बढ़ गया है, जिससे निर्यात करना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है।पेमेंट अटकने का डर: खाड़ी देशों के साथ भारत का अधिकांश व्यापार ‘क्रेडिट’ पर होता है। युद्ध की स्थिति में निर्यातकों को डर है कि उनका पुराना भुगतान (Payment) भी फंस सकता है।किसानों और कारोबारियों पर दोहरी मारआरएस पुरा के किसानों ने इस साल रिकॉर्ड पैदावार की उम्मीद जताई थी, लेकिन निर्यात रुकने से स्थानीय मंडियों में बासमती के दाम गिरने लगे हैं।बाजार में गिरावट: पिछले एक सप्ताह में बासमती की कीमतों में ₹500 से ₹800 प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई है।गोदाम फुल: निर्यात न होने के कारण राइस मिलों और कारोबारियों के गोदाम भर चुके हैं, जिससे नया माल खरीदने की क्षमता खत्म हो रही है।सरकार से मदद की गुहारऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (AIREA) ने वाणिज्य मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की है। निर्यातकों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा, तो न केवल चालू सीजन का नुकसान होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की हिस्सेदारी भी प्रभावित हो सकती है।
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