
ट्रेन में सफर करने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है,खासकर उनके लिए जो बिहार के भागलपुर-बड़हरवा रूट पर यात्रा करते हैं। जल्द ही इस रूट पर ट्रेनों का घंटों इंतजार करना और मालगाड़ियों के पीछे फंसे रहना गुजरे जमाने की बात हो जाएगी। भारतीय रेलवे ने इस इलाके की तस्वीर बदलने के लिए एक बहुत बड़ा प्लान तैयार किया है।क्या है यह बड़ा प्लान?पूर्व रेलवे ने बड़हरवा से भागलपुर के बीच दो नई रेल लाइनें (तीसरी और चौथी) बिछाने का एक भारी-भरकम प्रस्ताव तैयार किया है। इस256किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट पर लगभग4,880करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन नई पटरियों के बन जाने से इस रूट की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी,जिसका सीधा फायदा आम यात्रियों और व्यापारियों,दोनों को मिलेगा।अब ट्रेनें नहीं होंगी लेट,रॉकेट की तरह भरेंगी रफ्तारसोचिए,आप स्टेशन पर खड़े हैं और आपकी ट्रेन को इसलिए रोक दिया गया है क्योंकि सामने से कोई मालगाड़ी आ रही है या फिर लाइन खाली नहीं है। यह नजारा अब जल्द ही बदलने वाला है। जब चार पटरियां होंगी,तो ट्रेनों को पास कराने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। एक लाइन खाली न होने पर ट्रेन को तुरंत दूसरी या तीसरी लाइन से निकाला जा सकेगा।इतना ही नहीं,रेलवे इस रूट पर वंदे भारत,वंदे मेट्रो और अमृत भारत जैसी सेमी-हाई स्पीड ट्रेनें चलाने की भी तैयारी कर रहा है। इसके लिए पुरानी पटरियों के किनारे फेंसिंग (घेराबंदी) भी की जा रही है,ताकि कोई जानवर या इंसान अचानक ट्रैक पर न आ सके और ट्रेनें अपनी पूरी रफ्तार से दौड़ सकें।व्यापारियों और किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?यह प्रोजेक्ट सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं,बल्कि कोसी-सीमांचल,उत्तर बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एक वरदान साबित होगा। अभी ट्रेनें लेट होने के डर से व्यापारी अपना सामान,जैसे कि अनाज या कोयला,सीधे भेजने के बजाय वेयरहाउस या कोल्ड स्टोरेज में रखते हैं। इसका अतिरिक्त खर्च उनकी जेब पर पड़ता है।नई लाइनें बनने के बाद सामान को सीधे लोड करके तुरंत रवाना किया जा सकेगा। इससे समय बचेगा,सामान खराब होने का डर नहीं रहेगा और वेयरहाउस का किराया भी बचेगा। इससे पूरे इलाके में व्यापार को पंख लगेंगे और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।जमालपुर-भागलपुर रूट पर भी काम शुरूइस बड़े प्रोजेक्ट के साथ-साथ भागलपुर से जमालपुर के बीच53किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन बनाने का काम भी मंजूर हो चुका है। इस पर1156करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है। फिलहाल इसके लिए जमीन अधिग्रहण का काम चल रहा है।रेलवे का मानना है कि इन सभी प्रोजेक्ट्स से न केवल सफर आसान होगा,बल्कि रेलवे को भी करोड़ों का वित्तीय और व्यावसायिक लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर,यह योजना बिहार के दिल से गुजरने वाली रेल लाइनों के लिए एक नई जान फूंकने वाली है,जिसका असर हर किसी की जिंदगी पर पड़ेगा।
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