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अमेरिकी इंटेलिजेंस चीफ का विदाई धमाका! तुलसी गबार्ड ने डॉ. फाउची पर लगाए कोरोना का सच दबाने के बेहद संगीन आरोप

अमेरिका के सियासी गलियारों और वैश्विक खुफिया महकमे से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। डोनाल्ड ट्रंप सरकार की निवर्तमान डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन कुछ ऐसे सीक्रेट और संवेदनशील दस्तावेज सार्वजनिक कर दिए हैं, जिसने पूरी दुनिया की राजनीति में खलबली मचा दी है। गबार्ड ने सीधे तौर पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार रहे और दुनिया के जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फाउची पर कोरोना महामारी (COVID-19) के असली सच को दबाने और अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को गुमराह करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।

गबार्ड के दफ्तर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, डॉ. फाउची ने अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसों को चीन की उसी बदनाम वुहान लैब (WIV) में ट्रांसफर किया था, जहां से दुनिया भर में कोरोना वायरस के लीक होने का दावा किया जाता रहा है।

चीनी लैब को भेजे गए अमेरिकी जनता के करोड़ों डॉलर

तुलसी गबार्ड ने अपने पद से मुक्त होने से ठीक पहले "पहले कभी न देखे गए" कुछ बेहद गोपनीय खुफिया दस्तावेजों को डीक्लासिफाई यानी सार्वजनिक करते हुए बड़े दावे किए हैं। इन दस्तावेजों के अनुसार, डॉ. फाउची ने अमेरिकी नागरिकों के टैक्स के लाखों-करोड़ों डॉलर चीन के 'वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी' (WIV) को डायवर्ट किए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इस भारी-भरकम फंड का इस्तेमाल चमगादड़ों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस पर बेहद खतरनाक 'गेन्स-ऑफ-फंक्शन' रिसर्च के लिए किया गया था। इस रिसर्च का मुख्य मकसद वायरस की ताकत, संक्रामकता और इंसानों में फैलने की क्षमता को कृत्रिम रूप से बढ़ाना था।

दस्तावेजों में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब साल 2020 की शुरुआत में इस वायरस ने वैश्विक महामारी का रूप ले लिया, तो फाउची ने खुफिया एजेंसियों के कुछ शीर्ष अधिकारियों के साथ मिलकर एक सोची-समझी रणनीति के तहत इस बात को दबा दिया कि यह घातक वायरस असल में चीन की लैब से ही लीक (Lab-Leak) हुआ था।

'डीप स्टेट' का चक्रव्यूह और खुफिया एजेंसियों का इस्तेमाल

तुलसी गबार्ड के दफ्तर द्वारा जारी विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया है कि 85 वर्षीय डॉ. एंथनी फाउची लगभग 38 सालों तक अमेरिका की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था (NIAID) के चीफ रहे। इस लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने बड़ी-बड़ी ग्लोबल फार्मा कंपनियों (दवा निर्माताओं) के व्यावसायिक हितों और ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक वैक्सीन बाजार को फायदा पहुंचाने के चक्कर में इस खतरनाक और प्रतिबंधित रिसर्च को गुपचुप तरीके से बढ़ावा दिया।

बयान के मुताबिक, डॉ. फाउची ने पूरी स्क्रिप्ट पर्दे के पीछे से तैयार की थी। उन्होंने अपने कुछ पसंदीदा और वफादार वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम बनाई और अमेरिकी खुफिया कम्युनिटी पर इस बात का दबाव डाला कि वे पब्लिक के सामने सिर्फ इसी थ्योरी को रखें कि कोरोना वायरस किसी लैब से नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से मीट मार्केट या जानवरों के जरिए फैला है। इसके लिए एक सोचे-समझे नैरेटिव के तहत फर्जी रिसर्च पेपर भी तैयार करवाए गए ताकि लैब-लीक थ्योरी को पूरी तरह से खारिज किया जा सके। रिपोर्ट में यह भी दावा है कि जो भी वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी फाउची की इस बात से असहमत होता था, उसे नौकरी से निकालने या उसका करियर तबाह करने की धमकियां दी जाती थीं।

"अमेरिकी संसद के सामने कसम खाकर बोला गया झूठ"

तुलसी गबार्ड, जिन्होंने हाल ही में अपने बीमार पति की देखभाल की पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते डोनाल्ड ट्रंप की इंटेलिजेंस चीफ का हाई-प्रोफाइल पद छोड़ने का फैसला किया था, उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि फाउची के ये पैंतरे सीधे तौर पर 'डीप स्टेट' (पर्दे के पीछे से देश की चुनी हुई सरकार को प्रभावित करने वाला सीक्रेट नेटवर्क) की कार्यशैली को दर्शाते हैं।

गबार्ड ने खुलासा किया कि जून 2024 में जब अमेरिकी संसद की विशेष जूरी की सुनवाई के दौरान डॉ. फाउची से कसम खिलवाकर (Under Oath) पूछा गया था कि— "क्या उन्होंने महामारी के आने से पहले या उसके बाद में एफबीआई (FBI), सीआईए (CIA) या किसी अन्य अमेरिकी खुफिया एजेंसी से वायरस रिसर्च या लैब थ्योरी को लेकर कोई गोपनीय चर्चा की थी?" तो फाउची ने सीधे जवाबों से बचते हुए साफ मुकर गए थे कि उनके संज्ञान में ऐसी कोई बात नहीं है। जबकि अब गबार्ड द्वारा जारी किए गए नए और पुख्ता दस्तावेज गवाही दे रहे हैं कि वे लगातार खुफिया अधिकारियों के साथ गुप्त बैठकों और संपर्क में बने हुए थे।

वैश्विक संकट पर न्याय और पारदर्शिता की मांग

पद छोड़ते हुए तुलसी गबार्ड इस पूरे मामले पर काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा, "कोविड-19 महामारी ने न सिर्फ लाखों अमेरिकी नागरिकों की जान ली, बल्कि दुनिया भर के अनगिनत परिवारों को असहनीय दर्द, आर्थिक तबाही और मानसिक तकलीफें दी हैं। सालों तक चले इस झूठ, सेंसरशिप और सच को कालीन के नीचे छुपाने के खेल के बाद, अब अमेरिकी जनता और पूरी दुनिया इस पर पूरी पारदर्शिता, सच्चाई और सख्त इंसाफ की हकदार है।"

गबार्ड के इन बेहद संगीन, सीधे और कानूनी रूप से गंभीर आरोपों पर फिलहाल डॉ. एंथनी फाउची या उनकी लीगल टीम की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या सफाई सामने नहीं आई है। लेकिन इस विदाई धमाके ने बीती सदी के सबसे बड़े वैश्विक स्वास्थ्य संकट यानी कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर चल रही बहस में एक बार फिर नया बारूद भर दिया है।