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Iran Singer Parastoo Ahmadi: बिना हिजाब यूट्यूब पर गाया देशभक्ति गीत, ईरान में मशहूर सिंगर को मिली 74 कोड़े मारने की सजा

ईरान की जानी-मानी सिंगर परस्तू अहमदी और उनके आठ साथियों को एक ऑनलाइन कॉन्सर्ट करने के एवज में 74 कोड़े मारने की खौफनाक सजा सुनाई गई है। यह खबर सामने आते ही पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है। हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि आखिर एक लाइव म्यूजिक शो के लिए इतनी बेरहम सजा क्यों दी गई? दरअसल, 29 वर्षीय परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब पहने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर एक लाइव कॉन्सर्ट किया था, जिसमें उन्होंने ईरान का एक बेहद लोकप्रिय देशभक्ति गीत गाया था। इसी बात से नाराज होकर ईरानी प्रशासन ने उनके और उनके साथी संगीतकारों के खिलाफ यह सख्त कदम उठाया है।

स्लीवलेस कपड़े और बिना हिजाब के लाइव आना पड़ा भारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑनलाइन कॉन्सर्ट के दौरान परस्तू अहमदी ने इस्लामी नियमों के मुताबिक हिजाब नहीं पहना था और वह स्लीवलेस कपड़ों में नजर आ रही थीं। ईरान के कोम प्रांत की एक अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए इस कृत्य को देश के कानूनों का खुला उल्लंघन माना। कोर्ट ने सिंगर और उनके साथियों को 74 कोड़े मारने की सजा तो दी ही, साथ ही उन पर अगले दो साल तक किसी भी तरह की कलात्मक या सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने और देश छोड़ने पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।

अदालत ने लगाया अश्लीलता फैलाने का गंभीर आरोप

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब परस्तू अहमदी का 27 मिनट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। यूट्यूब पर इस वीडियो को लाखों व्यूज मिले, जिसमें वह चार पुरुष म्यूजिशियन के साथ जुगलबंदी करती दिख रही थीं। वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद ईरानी सुरक्षा एजेंसियों ने परस्तू और उनके साथी संगीतकारों को हिरासत में ले लिया था। हालांकि, बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया, लेकिन अदालत में मुकदमा चलता रहा। अब कोर्ट ने सिंगर पर 'अश्लील कंटेंट पब्लिश करने' और 'सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन करने' का दोषी पाते हुए यह फैसला सुनाया है।

'काल्पनिक कॉन्सर्ट' बना महिलाओं की आजादी का प्रतीक

परस्तू अहमदी ने इस वीडियो को इंटरनेट पर शेयर करते हुए इसके कैप्शन में 'काल्पनिक कॉन्सर्ट' लिखा था। दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों और सोशल मीडिया यूजर्स ने परस्तू के इस साहसिक कदम को महिलाओं की अभिव्यक्ति की आजादी और उनके अधिकारों का प्रतीक माना है। दूसरी तरफ, ईरानी हुकूमत ने इसे अपने पारंपरिक और कानूनी दायरों की तौहीन माना। आपको बता दें कि ईरान के कड़े इस्लामिक कानूनों के तहत महिलाओं के लिए सभी सार्वजनिक स्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हिजाब पहनना पूरी तरह अनिवार्य है, जिसका उल्लंघन करने पर बेहद संगीन सजा का प्रावधान है।